होर्मुझ खोलने के इराण के प्रस्ताव को अमेरिका ने ठुकराया, ट्रम्प ने बताया अस्वीकार्य
इराण-अमेरिका जंग में युद्धविराम की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही
इराण और अमेरिका के बीच जंग को अब कई महीने हो चुके हैं, लेकिन दोनों में से कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है। दोनों तरफ माल और जान का नुकसान हुआ है, फिर भी दोनों देश कमजोर दिखने के डर से हथियार नीचे रखने से इनकार कर रहे हैं। इस बीच दोनों देश एक-दूसरे को डील का प्रस्ताव देकर आगे निकलने की कोशिश में लगे हैं।
इराण अपनी शर्तों पर अड़ा है, जबकि अमेरिका भी इस मसले के हल के तौर पर इराण के नए प्रस्ताव पर नजर रखे हुए था। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुझ की खाड़ी को दोबारा खोलने के लिए इराण की तरफ से रखे गए प्रस्ताव को अमेरिका-इराण टकराव की पृष्ठभूमि में खारिज कर दिया है।
ट्रम्प ने साफ कहा कि इराण का यह प्रस्ताव अस्वीकार्य है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही थी, उसी वक्त ट्रम्प का यह रुख सामने आया।
इराण ने अमेरिका के सामने युद्धविराम और होर्मुझ की खाड़ी को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। इराण की मांग थी कि अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे और उस पर लगी आर्थिक नाकेबंदी में ढील दे। इराण ने यह भी कहा था कि अगर इन शर्तों पर सहमति बनती है तो सात दिनों के भीतर होर्मुझ से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू कर दी जाएगी।
पर्शियन गल्फ और अरब सागर को जोड़ने वाली होर्मुझ की खाड़ी दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए बहुत अहम मानी जाती है, क्योंकि इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और नैचुरल गैस की ढुलाई होती है। इस रास्ते पर आवाजाही बाधित होने से ऊर्जा बाजार और कई देशों की इकॉनॉमी पर असर पड़ने की संभावना है। अमेरिका होर्मुझ से मुक्त और सुरक्षित जहाजरानी पर जोर दे रहा है, जबकि इराण इसके बदले अमेरिका से दबाव कम करने की मांग कर रहा है।
इराण का प्रस्ताव सामने आने के बाद ट्रम्प ने उसे मानने से इनकार कर दिया, जिससे अमेरिका और इराण के बीच बातचीत में फिर मतभेद पैदा हो गए हैं। इराण की तरफ से राजनयिक तरीके से हल निकालने की तैयारी जताई जा रही है, लेकिन अमेरिका का रुख है कि दबाव कम करने से पहले उसकी मुख्य मांगें पूरी होनी चाहिए। नतीजा यह है कि होर्मुझ की खाड़ी को पूरी तरह दोबारा खोलने का मसला अभी भी बातचीत के केंद्र में बना हुआ है।