34 कर्जदार देशों ने बनाया नया मंच, एक साल के लिए अध्यक्ष बना पाकिस्तान
UNCTAD के सहयोग से बने इस मंच में पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब पहले अध्यक्ष होंगे।
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दुनिया के 34 ऐसे देश, जो भारी कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, एक साथ आए हैं और उन्होंने एक नया औपचारिक मंच बनाया है। इस मंच की अध्यक्षता एक साल के लिए पाकिस्तान को सौंपी गई है। पाकिस्तान पर 291 अब्ज डॉलर का कर्ज है।
यह फैसला थाईलैंड में हुई कर्जदार देशों की एक अहम बैठक में लिया गया। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब इस संगठन के पहले अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे।
यह मंच संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संस्था (UNCTAD) के सहयोग से खड़ा किया गया है। इसका मकसद विकासशील और गरीब देशों को कर्ज से जुड़ी जो गंभीर समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं, उन पर चर्चा करना, मिलकर हल खोजना और एक दूसरे के अनुभव से सीखना है। मंच बनाने की प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी। शुरुआत में मिस्र को अंतरिम अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन सभी सदस्य देशों की आम सहमति के बाद अब पाकिस्तान को इसकी कमान दी गई है।
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक इस नए मंच में अलग अलग महाद्वीपों के आर्थिक रूप से कमजोर और कर्जदार देश शामिल हैं। पाकिस्तान के अलावा इसमें मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, फिजी, सीरिया, सूडान, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सिएरा लियोन, नामीबिया और मॉरीशस हैं।
इनके साथ मालदीव, मेडागास्कर, लेबनान, लेसोथो, केन्या, जॉर्डन, होंडुरास, गिनी, घाना, गैबॉन, इस्वातिनी, इक्वाडोर, कांगो, बारबाडोस और भूटान जैसे छोटे विकासशील देश भी सदस्य हैं। इन सभी देशों के सामने अपना सार्वजनिक कर्ज चुकाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।
अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज 81.4 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये यानी करीब 293 अब्ज डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें देश के भीतर लिया गया कर्ज और विदेशी कर्ज का बड़ा हिस्सा शामिल है। अध्यक्ष पद संभालने के बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने कहा कि कर्जमुक्त होना और आर्थिक स्थिरता हासिल करना उनकी मुख्य कोशिश होगी।
इस मंच के जरिए ये देश अपने कर्ज प्रबंधन को मजबूत करने, वित्तीय सुधारों में एक दूसरे का साथ देने और बड़े विकास प्रोजेक्टों के लिए पूंजी जुटाने के नए और सुरक्षित रास्ते खोजने पर जोर देंगे।
UNCTAD की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देश इस समय अपने कर्ज पर बहुत महंगा ब्याज चुका रहे हैं। 2025 में इन देशों ने ब्याज के तौर पर 1 ट्रिलियन डॉलर चुकाए, जो 2010 के मुकाबले तीन गुना है।
विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना बेहद महंगा है। वे सार्वजनिक कर्ज पर औसतन 5.2 फीसदी ब्याज दे रहे हैं, जबकि विकसित देशों में यही दर सिर्फ 2.2 फीसदी है। दुनिया भर में 3 करोड़ 7 लाख लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जहां सरकार को सेहत या शिक्षा से ज्यादा पैसा सिर्फ कर्ज के ब्याज पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में इस नए मंच की अहमियत समझ में आती है।