मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:59 IST

खामेनेई का दावा, अमेरिका को मध्य पूर्व से हटना होगा, आखाती अड्डों और होर्मुझ पर चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजताबा खामेनेई ने कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका के लिए कोई जगह नहीं है और आखाती देश अब अमेरिकी फौजी अड्डों के लिए ढाल नहीं बनेंगे।

खामेनेई का दावा, अमेरिका को मध्य पूर्व से हटना होगा, आखाती अड्डों और होर्मुझ पर चेतावनी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच चली जंग में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजताबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। मोजताबा पहले ईरान की फौज IRGC में रह चुके हैं, और कहा जाता है कि ईरान-इराक जंग में भी उनकी भूमिका रही थी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अपने पिता की मौत के बाद सर्वोच्च नेता बने मोजताबा अमेरिका के लिए पहले से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। मोजताबा सार्वजनिक तौर पर बहुत कम नजर आते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस जंग में हुए एक हमले में वे बुरी तरह जख्मी हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है, लेकिन ईरान सरकार ने बार-बार इन दावों को खारिज किया है।

मध्य पूर्व के इस बंजर इलाके में जब से तेल के भंडार मिले हैं, तब से यहां अशांति ज्यादा देखने को मिली है। इसकी वजह कई मुद्दे और राजनीति है। पहले अमेरिका ने डॉलर को सोने से जोड़ा था और तब तक मध्य पूर्व में इतना संघर्ष नहीं था। लेकिन जब अमेरिका को समझ आया कि सोना हमेशा के लिए टिकने वाली चीज नहीं है जबकि दुनिया की राजनीति में तेल का कोई विकल्प नहीं है, तब अमेरिका ने डॉलर को तेल से जोड़ दिया, और इसी के साथ मध्य पूर्व में पेट्रो डॉलर का खेल शुरू हुआ।

उस दौर में आखाती अरब देशों का ईरान से कई मुद्दों पर विवाद चल रहा था। खुद को ईरान से बचाने के लिए इन देशों ने अपनी जमीन अमेरिकी फौज को दे दी, और इसी वजह से अमेरिका और ईरान सीधे आमने-सामने आ गए।

इस जंग में जिन-जिन देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपनी जमीन इस्तेमाल करने दी, ईरान ने उन सभी देशों पर जोरदार हमले किए। अमेरिकी फौज को वहां से भागना पड़ा। इतना ही नहीं, जब अमेरिकी सैनिकों ने अपने अड्डे छोड़कर दूसरे इलाकों और होटलों में रहना शुरू किया, तब ईरान ने ठीक उन्हीं जगहों पर हमले करके अमेरिका और उसे जगह देने वाले देशों को डरा दिया।

इसके बाद मध्य पूर्व में यह धारणा टूटने लगी कि अमेरिका इन देशों की हिफाजत करेगा, और ये देश दबी जुबान में ईरान से डील करने की बात करने लगे। इसी पर मोजताबा खामेनेई ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व के देश अब अमेरिकी फौजी अड्डों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे।

खामेनेई के मुताबिक, फारस की खाड़ी में अमेरिकी फौज की मौजूदगी ही इलाके में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि आगे इस इलाके में अमेरिका को ज्यादा दखलअंदाजी करने नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि ईरान हो या मध्य पूर्व के बाकी सभी देश, ये सब संप्रभु हैं और इन्हें अमेरिका की सलाह या किसी और चीज की जरूरत नहीं है।

होर्मुझ की खाड़ी को लेकर भी ईरान का रुख सख्त बना हुआ है। खामेनेई ने आखाती इलाके में विदेशी फौजी मौजूदगी को चुनौती देते हुए कहा कि मध्य पूर्व के देशों को अमेरिका और इस्राइल को दरकिनार करके आपस में एकजुट होकर काम करना चाहिए।

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