बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:53 IST

वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों पर घर और जमीन की मार, पर 27 अक्टूबर के चुनाव में उनकी आवाज नहीं

बस्तियों के फैलाव, घरों पर कार्रवाई और रोजमर्रा की रुकावटों के बीच वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी इजरायल के चुनाव में खुद को बिना प्रतिनिधित्व वाला बता रहे हैं।

वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों पर घर और जमीन की मार, पर 27 अक्टूबर के चुनाव में उनकी आवाज नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

इजरायल और हमास के संघर्ष की वजह से वेस्ट बैंक में आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इजरायली सैनिकों और वहां बसे इजरायली लोगों की दबंगई दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, और इससे वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी नागरिकों में उपेक्षा की भावना तेज हो रही है।

बस्तियों का विस्तार, फिलिस्तीनियों के घर गिराए जाना, खेती की जमीन पर कब्जा और रोजमर्रा की आवाजाही में रुकावट डालकर परेशान किया जाना, इन सबने वहां के लोगों की जिंदगी और कठिन कर दी है। इसके बावजूद 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में उन्हें न कोई प्रतिनिधित्व मिला है, न कोई असरदार राजनीतिक जगह। इस बात की टीस ये नागरिक जता रहे हैं।

वेस्ट बैंक के जबल अल बाबा के बेदुइन समुदाय के लोगों के मुताबिक इजरायली प्रशासन उनकी रोजमर्रा की लगभग हर चीज पर नियंत्रण रखने लगा है। घर बनाना, पानी मिलना, सड़कों का इस्तेमाल, खेती पर आक्रमण और एक शहर से दूसरे शहर आना-जाना, हर मामले में उन्हें कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

इस इलाके के लोगों का कहना है कि इजरायल की ऐसी अमानवीय नीतियों का उनके जीवन और भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा। लेकिन सरकार चुनने की प्रक्रिया में वे हिस्सा नहीं ले सकते। दूसरी तरफ वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों में रहने वाले यहूदी नागरिकों को इजरायल के राष्ट्रीय चुनाव में वोट डालने का अधिकार है। इससे दोनों समुदायों के राजनीतिक अधिकारों का फर्क और साफ दिखाई दे रहा है।

वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का फैलाव फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। खासकर जेरुसलेम के पास के E-1 प्रोजेक्ट की वजह से कई बेदुइन समुदायों के सामने विस्थापन का खतरा खड़ा हो गया है। इस प्रोजेक्ट से वेस्ट बैंक का भौगोलिक जुड़ाव भी टूट सकता है, ऐसी आशंका जताई जा रही है।

आरोप है कि फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए घर बनाने की इजाजत लेना बेहद मुश्किल है। इजाजत न होने के कारण कई घरों पर कार्रवाई की जाती है। नागरिक यह विरोधाभास भी सामने रख रहे हैं कि उसी इलाके में इजरायली बस्तियों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

27 अक्टूबर के चुनाव में इजरायल में किसकी सरकार बनेगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर है। मगर फिलिस्तीनी नागरिकों को नहीं लगता कि चुनाव नतीजों से उनके हालात में कोई खास बदलाव आएगा। उनका कहना है कि बस्तियों के मुद्दे पर इजरायल के सत्ताधारी और विपक्षी दलों की नीतियों में कोई बुनियादी फर्क नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि आने वाला चुनाव फिलिस्तीनियों के लिए उम्मीद की किरण बनेगा या उनकी राजनीतिक उपेक्षा बनी रहेगी।

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