मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:40 IST

ईरान की दक्षिणी बंदरगाहों पर पाबंदी से तुर्की सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें

बंदरगाहों पर लगी रोक के चलते ईरानी व्यापारी अब जमीनी रास्ते का सहारा ले रहे हैं, जिससे तुर्की सीमा पर ट्रकों की किलोमीटरों लंबी कतारें लग गई हैं और आयातदारों की ढुलाई लागत बढ़ गई है।

ईरान की दक्षिणी बंदरगाहों पर पाबंदी से तुर्की सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

28 फरवरी 2026 को शुरू हुई जंग अब भी जारी है। न ईरान अमेरिका के सामने झुकने को तैयार है, न अमेरिका ईरान के सामने। इस जंग के अब तक 211 दिन पूरे हो चुके हैं। इसी जंग की वजह से ईरान की होर्मुज जलसंधि पूरी तरह बंद हो गई है, जबकि इसी समुद्री रास्ते से दुनिया का करीब 20 फीसदी माल ढोया जाता है।

जंग का दायरा बढ़ने के साथ अब सऊदी और हूती के बीच भी लड़ाई छिड़ गई है, और हूतियों ने लाल सागर के दूसरे समुद्री रास्ते यानी बाब अल मंदेब को भी बंद कर दिया है। होर्मुज बंद होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज के प्रवेशद्वार पर नाकाबंदी कर दी है।

इस वजह से चीन को छोड़कर बाकी किसी भी देश के साथ ईरान का व्यापार करना मुश्किल हो गया है। इस पूरे हालात से ग्लोबल मार्केट सुस्त पड़ गया है और महंगाई बढ़ गई है। खुद को दुनिया का पुलिस वाला और सबसे बड़ी ताकत मानने वाले अमेरिका को ईरान ने पसीना छुड़ा दिया है।

हालांकि, इस पूरे बदलते हालात का अमेरिका पर अब तक कोई खास असर होता नहीं दिखा है, या फिर हुआ भी होगा तो उसकी खबरें दुनिया भर में उतनी फैली नहीं हैं। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि अमेरिका मौज में है और बाकी दुनिया परेशान है।

दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान की नाक में दम कर रखा है। ईरान की दक्षिणी बंदरगाहों पर व्यापार को लेकर लगी पाबंदियों और अड़चनों के चलते वहां के आयातदारों ने अब बड़े पैमाने पर मालढुलाई के लिए जमीनी रास्ते का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसी वजह से ईरान-तुर्की सीमा पर मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं, और कुछ जगहों पर तो ये कतारें किलोमीटरों तक पहुंच गई हैं।

ईरान के विदेशी व्यापार में दक्षिणी बंदरगाहों की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। मगर पाबंदियों के चलते आयात प्रक्रिया में अड़चनें आने से व्यापारियों को दूसरे रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। तुर्की के रास्ते यूरोप और बाकी बाजारों से जुड़ने वाला जमीनी रास्ता अब ज्यादा अहम हो गया है, जिससे इस रूट पर मालढुलाई का दबाव काफी बढ़ गया है।

व्यापार का बड़ा हिस्सा जमीनी रास्ते की ओर मुड़ने से ईरान-तुर्की सीमा पर मौजूद कस्टम और जांच केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई है। मालवाहक ट्रकों की लंबी कतारों की वजह से ड्राइवरों को सीमा पार करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इस देरी का सीधा असर आयात होने वाले सामान की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।

दक्षिणी बंदरगाहों पर आई अड़चनों से जमीनी रास्ते का इस्तेमाल बढ़ने के चलते पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव आ गया है। लंबा इंतजार, कस्टम की प्रक्रिया और बढ़ी हुई दूरी की वजह से माल पहुंचाने में लगने वाला वक्त और खर्च, दोनों बढ़ सकते हैं। यानी पाबंदियों का असर अब सिर्फ बंदरगाहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान की पूरी सप्लाई चेन पर दिखने लगा है।

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