गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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हर साल 5 नवंबर को मनता है सुनामी जागरूकता दिवस, जापान के हामागुची गोरो की याद से जुड़ा है नाता

हर साल 5 नवंबर को मनता है सुनामी जागरूकता दिवस, जापान के हामागुची गोरो की याद से जुड़ा है नाता तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

दुनिया भर में 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसकी जड़ें 1854 की जापान की सुनामी और हामागुची गोरो की बहादुरी से जुड़ी हैं।

कुदरत जितनी खूबसूरत और मन को भाने वाली होती है, कभी-कभी उतना ही तबाही मचाने वाला और डरावना रूप भी ले सकती है। सबसे भयानक और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है सुनामी (Tsunami)। समुद्र की गहराई से उठने वाली ये विशाल लहरें चंद पलों में पूरे किनारे के इलाके को उजाड़ देने की ताकत रखती हैं। इसी बड़ी आफत और उससे बचने के तरीकों के बारे में दुनिया भर के लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस (World Tsunami Awareness Day) मनाया जाता है। इंसानी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से इस दिन की अहमियत बहुत खास है।

अब सवाल यह कि सुनामी आखिर है क्या और बनती कैसे है? सुनामी जापानी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है 'हार्बर वेव' यानी खाड़ी या किनारे पर आने वाली लहरें। आसान शब्दों में कहें तो समुद्र के नीचे तेज भूकंप आए, पानी के अंदर ज्वालामुखी फटे या गहरे समुद्र में जमीन धंसे या खिसके, तो भारी ऊर्जा पैदा होती है। इस ऊर्जा से समुद्र की सतह पर बहुत बड़ी और तेज रफ्तार लहरें बन जाती हैं। जब ये लहरें किनारे की ओर बढ़ती हैं, तो पानी की गहराई कम होने से उनका आकार कई गुना बढ़ जाता है। फिर वे किनारे से टकराकर भारी तबाही मचाती हैं। इसमें जान का नुकसान तो होता ही है, करोड़ों रुपये की आर्थिक चोट भी पहुंचती है।

किसी भी कुदरती आपदा को हम रोक नहीं सकते, लेकिन सही प्लानिंग और तैयारी से नुकसान जरूर कम कर सकते हैं। आज की आधुनिक टेक्नोलॉजी के दौर में सुनामी की चेतावनी देने वाले अत्याधुनिक पूर्वसूचना सिस्टम (Tsunami Warning Systems) तैयार किए गए हैं। समुद्र में लगाए गए सेंसर और सैटेलाइट के जरिए सुनामी की लहरों की हलचल पहले ही पकड़ ली जाती है, जिससे किनारे पर रहने वालों को वक्त रहते सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सकता है। इस दिन लोगों को आपदा के वक्त शांत रहने, घबराए बिना सुरक्षित पनाह की तरफ जाने का डेमो और ट्रेनिंग भी दी जाती है।

इस दिन की शुरुआत के पीछे जापान का एक प्रेरणा देने वाला किस्सा है। 1854 में जापान में भीषण सुनामी आई थी। उस वक्त हामागुची गोरो (Hamaguchi Goryo) नाम के एक हिम्मती शख्स ने अपनी दूरदर्शिता और सूझबूझ से कई गांव वालों की जान बचाई थी। उन्होंने पहाड़ पर आग लगाकर गांव वालों को ऊंचाई पर आने का इशारा दिया, जिससे बहुत से लोग मरने से बच गए। उनके इसी बड़े त्याग और बहादुरी की याद में यह दिन चुना गया।

आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने 2015 में 5 नवंबर को आधिकारिक तौर पर विश्व सुनामी जागरूकता दिवस घोषित किया। तब से हर साल दुनिया भर में आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाएं, स्कूल, कॉलेज और सरकारी स्तर पर तरह-तरह के कार्यक्रम होते हैं। किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा के सबक सिखाए जाते हैं और इमरजेंसी में हालात से कैसे निपटना है, इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। बदलते मौसम के इस दौर में इस दिन की अहमियत और बढ़ गई है।

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