ग्रामीण भारत में 100 लड़कों पर सिर्फ 59 लड़कियां पूरी कर पाती हैं 12वीं, यूनेस्को की रिपोर्ट
यूनेस्को की नई रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 25 साल में स्कूली शिक्षा में लड़के और लड़कियों का फासला घटा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में लड़कियों के लिए 12वीं तक पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती है।
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पिछले 25 साल में भारत की स्कूली शिक्षा में लड़के और लड़कियों के बीच का फासला काफी घटा है। लेकिन यूनेस्को की एक नई रिपोर्ट बताती है कि गांवों में लड़कियों के लिए 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट के आंकड़ों के हिसाब से ग्रामीण भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा, यानी 11वीं और 12वीं, पूरी करने वाले हर 100 लड़कों पर लड़कियां सिर्फ 59 हैं। शहरों की तस्वीर इससे अलग है। वहां पढ़ाई पूरी करने के मामले में लड़के और लड़कियां लगभग बराबरी पर पहुंच चुके हैं।
यह रिपोर्ट 31 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लैंगिक असमानता का अध्ययन करती है। इसमें कहा गया है कि भारत ने लंबे समय में लड़कियों की शिक्षा की शुरुआती खामियों को काफी हद तक दूर कर लिया है। फिर भी इस प्रगति का फायदा सभी तबकों तक बराबर नहीं पहुंचा। आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की लड़कियों को अब भी पढ़ाई जारी रखने में दिक्कतें आ रही हैं।
रिपोर्ट में भारत का समायोजित जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) कुल मिलाकर 0.89 दर्ज किया गया है। इसमें ग्रामीण इलाकों का आंकड़ा 0.59 है, जबकि शहरी इलाकों में यह 1.0 है। इसका मतलब है कि गांवों में 12वीं तक टिकने वाली लड़कियों की तादाद आज भी कम है।
खासकर किशोरावस्था में पहुंचने के बाद ग्रामीण लड़कियों के स्कूल छोड़ने का सिलसिला चिंता की बात है। ASER 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 16 साल की उम्र की 8.1 प्रतिशत लड़कियां स्कूल में नामांकित ही नहीं थीं। इसके अलावा गरीबी और घर की आर्थिक हालत की वजह से लड़कों और लड़कियों की पढ़ाई के बीच का अंतर बढ़ता दिखता है।
छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को लेकर भी रिपोर्ट में एक अहम बात सामने आई है। भारत में 5 साल की उम्र के 51 प्रतिशत बच्चे सीधे पहली कक्षा में दाखिला ले रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नियमों के हिसाब से यह उम्र कम मानी जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ राज्यों में प्री-प्राइमरी स्तर पर हालात बेहतर हैं। इसके बावजूद कुल मिलाकर ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने और उन्हें उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी कराने के लिए नीतिगत स्तर पर और कोशिशों की जरूरत है।