NEET-UG के लिए उम्र की सीमा और अटेम्प्ट तय करने की सिफारिश, संसदीय समिति ने सौंपी रिपोर्ट
संसदीय समिति ने एनटीए के कामकाज पर अपनी रिपोर्ट में NEET-UG के लिए अधिकतम उम्र और प्रयासों की संख्या तय करने को कहा है।
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देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली NEET परीक्षा को पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए एक संसदीय समिति ने बड़ी सिफारिश की है। समिति का कहना है कि NEET-UG में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र और परीक्षा देने के प्रयासों की संख्या तय की जानी चाहिए।
यह समिति शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी है और इसके अध्यक्ष कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक हैं। समिति ने एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के कामकाज पर जो रिपोर्ट पेश की है, उसी में यह बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक एनटीए को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ तालमेल बैठाकर NEET-UG के लिए उम्र और प्रयासों की सीमा जल्द से जल्द तय करनी चाहिए।
यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि फिलहाल NEET-UG में बैठने के लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है।
समिति ने एनटीए को यह सलाह भी दी है कि NEET-UG को लिखित यानी पेन-पेपर तरीके से कराने की जगह कंप्यूटर आधारित तरीके से कराया जाए, जैसे जेईई मेन, यूजीसी नेट और सीयूईटी होती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे पेपर लीक को पूरी तरह रोकने के लिए एनटीए को यह बड़ा तकनीकी बदलाव युद्धस्तर पर लागू करने का काम शुरू कर देना चाहिए।
रिपोर्ट में पायाभूत सुविधाओं को लेकर भी कई बातें कही गई हैं। टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में सरकार के नियंत्रण वाली सुविधाएं खड़ी करने के लिए पर्याप्त निवेश किया जाना चाहिए। दूर-दराज और उपेक्षित इलाकों में जब तक कंप्यूटर आधारित परीक्षा की मजबूत व्यवस्था तैयार नहीं हो जाती, तब तक वहां परीक्षाएं हाइब्रिड तरीके से ली जानी चाहिए।
हाइब्रिड तरीके में प्रश्नपत्र डिजिटल रूप में संबंधित परीक्षा केंद्र पर भेजा जा सकता है और वहीं तुरंत उसकी छपाई की व्यवस्था की जा सकती है।
सुरक्षा और निष्पक्षता पक्की करने के लिए संसदीय समिति ने देशभर में 1,000 सरकारी और सुरक्षित परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की है। समिति ने सुझाव दिया है कि हर जिले में कम से कम एक सरकारी परीक्षा केंद्र बनाया जाए।