गोवा में नाना पाटेकर का निधन, 75 की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से गई जान
गुरुवार 11 अक्टूबर की सुबह तड़के गोवा में अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया। पुलिस ने प्राकृतिक मौत दर्ज की है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मराठी और हिंदी सिनेमा की एक बड़ी आवाज़ खामोश हो गई। सबके चहेते अभिनेता नाना पाटेकर अब नहीं रहे। गुरुवार 11 अक्टूबर की सुबह तड़के गोवा में उनका निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक 75 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनकी जान गई।
खबर मिलते ही महाराष्ट्र समेत पूरी फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा। नाना हमेशा फिट रहते थे और उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं थी, इसलिए हर कोई यही पूछ रहा है कि अचानक ऐसा कैसे हो गया।
पुलिस की दी जानकारी के मुताबिक नाना पाटेकर गोवा के दोनापावला में ओशन पार्क सोसाइटी में रहते थे। उस रात घर में उनके साथ एक केयरटेकर था। रात 11.30 बजे तक उनके करीबी दोस्त अमेय नाईक उनके साथ थे। अमेय नाईक उनके फैमिली फ्रेंड हैं। उन्होंने बताया कि 11.30 बजे तक नाना बिल्कुल नॉर्मल थे और उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी।
इसके बाद अमेय घर चले गए। रात 2.30 बजे नाना को बेचैनी होने लगी और उन्होंने फौरन अमेय नाईक को मैसेज किया। मैसेज में लिखा था, "मुझे अस्वस्थ लग रहा है"।
रात का वक्त था, इसलिए अमेय ने वह मैसेज सुबह 3.30 बजे देखा। मैसेज देखते ही उन्होंने नाना को फोन लगाया, पर नाना ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद वे तुरंत दौड़कर नाना के घर पहुंचे।
घर पहुंचे तो नाना सोफे पर बैठे थे और उनकी तबीयत बहुत खराब थी। उन्होंने बताया कि सीने के बाईं तरफ दर्द हो रहा है और बहुत दबाव महसूस हो रहा है। अमेय ने उसी वक्त अस्पताल चलने का फैसला किया। नाना कपड़े बदलने गए और लौटकर सोफे पर बैठे, तभी बेहोश हो गए।
हालत गंभीर होने पर अमेय नाईक ने वॉचमैन की मदद से फौरन एम्बुलेंस बुलाई। नाना के घर से मणिपाल हॉस्पिटल सिर्फ 4 से 5 मिनट की दूरी पर था। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने 45 मिनट तक CPR दिया और पूरी कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सुबह 5.20 बजे डॉक्टरों ने नाना पाटेकर को मृत घोषित कर दिया।
अब सब यही कह रहे हैं कि अगर वह मैसेज रात 2.30 बजे ही देख लिया जाता तो शायद नाना को जल्दी मदद मिल जाती और वे आज हमारे बीच होते। पुलिस ने इस मामले में प्राकृतिक मौत दर्ज की है और आगे की जांच जारी है।
नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता नहीं थे, वे एक शख्सियत थे। परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर और नटसम्राट जैसी फिल्मों में उनका काम लोग कभी नहीं भूलेंगे। उनकी आवाज़, उनका अंदाज़ और साफ बोलने का तरीका ही उनकी पहचान थी।
फिल्मों से बाहर भी उन्होंने बड़ा काम किया। किसानों के लिए उन्होंने नाम फाउंडेशन शुरू किया था। वे हमेशा आम आदमी के साथ खड़े रहे। उनके जाने से सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, पूरा महाराष्ट्र अनाथ हो गया है।