यूनेस्को की चेतावनी: 2030 तक दुनिया को 4.4 करोड़ और शिक्षक चाहिए होंगे
विश्व शिक्षक दिवस पर यूनेस्को ने कहा कि 2030 तक सबको प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा देने के लिए 4.4 करोड़ अतिरिक्त शिक्षक चाहिए।
हर साल 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ शिक्षकों के योगदान को याद करने के लिए नहीं है। यह इस बात पर ध्यान दिलाने का भी मौका है कि शिक्षक किन मुश्किल हालात में काम करते हैं और शिक्षा व्यवस्था उन्हें पेशेवर और आर्थिक तौर पर कितना सहारा दे रही है।
इस साल का शिक्षक दिवस 2026 खास है, क्योंकि 1966 में शिक्षकों की स्थिति पर तैयार की गई अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों को 60 साल पूरे हो रहे हैं। इसी मौके पर यूनेस्को (UNESCO) ने बड़ी चेतावनी दी है। उसका कहना है कि 2030 तक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा सबके लिए पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करना है, तो दुनिया को 4.4 करोड़ अतिरिक्त शिक्षक चाहिए होंगे।
यह दिन 5 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है, इसकी वजह भी इतिहास में है। 5 अक्टूबर 1966 को यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के साझा आयोजन में एक खास अंतरराष्ट्रीय परिषद हुई थी। उसमें शिक्षकों की स्थिति पर एक अहम सिफारिश मंजूर की गई। इसमें शिक्षकों के अधिकार, उनकी जिम्मेदारियां, तैयारी, भर्ती, रोजगार और पढ़ाने के हालात से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए गए थे। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में 1994 से हर साल 5 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाने लगा।
यूनेस्को ने इस साल की थीम रखी है "Standing with teachers: 60 years of protecting the profession, advancing its status and shaping our futures"। इस थीम का मकसद सिर्फ शिक्षकों को धन्यवाद कहना नहीं है। असल सवाल यह उठाना है कि क्या शिक्षा प्रणाली शिक्षकों को अपना काम बेहतर ढंग से करने के लिए जरूरी पेशेवर और आर्थिक सहारा दे रही है।
पिछले छह दशकों में शिक्षा और समाज में बड़े बदलाव आए हैं। आज के डिजिटल दौर में शिक्षकों के सामने डिजिटल तकनीक, जलवायु परिवर्तन, पलायन और विस्थापन जैसी नई चुनौतियां जुड़ गई हैं। इसके अलावा शिक्षकों की स्वायत्तता, नीति बनाने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी, वेतन, काम का बढ़ता दबाव और काम का माहौल भी अहम मुद्दे बन गए हैं। इसी वजह से बदले हालात के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय मानकों को ठीक करने के लिए इन सिफारिशों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है।
यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 से 2030 के बीच शिक्षा क्षेत्र के सामने चुनौती सिर्फ नए शिक्षकों की भर्ती की नहीं है। जो शिक्षक अभी काम कर रहे हैं, उन्हें पेशे में टिकाए रखना और उन्हें बेहतर कामकाजी हालात और सही सहारा देना भी उतना ही जरूरी होगा।
इस साल विश्व शिक्षक दिवस 2026 का मुख्य वैश्विक समारोह 5 अक्टूबर को पेरिस (फ्रांस) में यूनेस्को के मुख्यालय में रखा गया है। इसमें दुनिया भर से आए शिक्षक, शिक्षा मंत्री और शिक्षा क्षेत्र के दूसरे जानकार शामिल हो रहे हैं। वे शिक्षकों के अधिकार, काम के हालात और बदलती शिक्षा प्रणाली में उनकी भूमिका पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं।