गोकुल के सरकारी नामित निदेशकों पर कोल्हापुर में गुस्सा, किसानों ने सरकार का पुतला फूंका
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कसबा बावडा में दूध उत्पादक किसानों ने गोकुल के पांच सरकार-नियुक्त निदेशकों के फैसले के खिलाफ पुतला जलाया। सोमवार को 25 हजार से ज्यादा लोगों के मोर्चे की चेतावनी दी गई है।
कोल्हापुर के कसबा बावडा इलाके में गोकुल दूध संघ के पांच सरकार-नियुक्त निदेशकों के फैसले के खिलाफ दूध उत्पादक किसानों और स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भगवा चौक में आंदोलनकारियों ने सरकार का प्रतीकात्मक पुतला जलाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि गोकुल में सरकार की ओर से निदेशक बिठाने का यह फैसला दूध उत्पादक किसानों और संस्था के सदस्यों के साथ अन्याय है। प्रदर्शन में कसबा बावडा और लाइन बाजार इलाके के दूध उत्पादक किसान, स्थानीय नागरिक और अलग-अलग संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाकर उन्होंने अपना गुस्सा जताया।
आंदोलन के नेताओं ने आगे की लड़ाई का एलान भी कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले सोमवार को कसबा बावडा और लाइन बाजार इलाके के 25 हजार से ज्यादा नागरिक और दूध उत्पादक किसान एक साथ आकर बड़ा मोर्चा निकालेंगे। बताया गया है कि इस मोर्चे में मौजूदा और पूर्व पार्षद, श्रीराम सेवा संस्था के पदाधिकारी और इलाके के दूध उत्पादक शामिल होंगे।
इस बीच कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने भी गोकुल के सरकार-नियुक्त निदेशकों के फैसले पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा, "गोकुल तुम्हारी जागीर नहीं है। सदस्यों का जनादेश कुचलकर अपने लोगों को संस्था में घुसाने की कोशिश मत करो।" पाटील ने यह भी आरोप लगाया कि चार नियुक्त सदस्यों को वोट देने का अधिकार देना सदस्यों के जनादेश पर सरकारी डकैती है।
महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी संस्था सुधार अध्यादेश 2026 जारी किया है। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार वाली पात्र सहकारी संस्थाओं की प्रबंधन समिति में पांच सरकार-नियुक्त सदस्य रखने का प्रावधान किया गया है। इनमें एक सरकारी अधिकारी होगा और चार ऐसे विशेषज्ञ होंगे, जिन्हें सहकारी संस्थाओं का अनुभव है।
इस फैसले से गोकुल का विवाद अब सिर्फ सहकारी संस्था तक सीमित नहीं रहा, और कोल्हापुर की राजनीति में भी बड़े टकराव के संकेत दिख रहे हैं।
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