गोकुल अध्यक्ष चुनाव: हसन मुश्रीफ ने सतेज पाटील से कहा, फॉर्म्युला आप ही दें
कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में 14 संचालकों का कोरम पूरा नहीं हो रहा। मंत्री हसन मुश्रीफ ने कांग्रेस नेता सतेज पाटील को फॉर्म्युला सुझाने की पेशकश की है।
कोल्हापुर के मशहूर गोकुल दूध संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मंत्री हसन मुश्रीफ ने कांग्रेस नेता सतेज पाटील को पेशकश की है कि अध्यक्ष चुनने के लिए वे खुद फॉर्मूला सुझाएं।
गोकुल के संचालक मंडल की 25 सीटों के चुनाव में सतेज पाटील की अगुवाई वाले समविचारी गठबंधन ने 13 सीटें जीतीं, जबकि महायुति को 12 सीटें मिलीं। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 संचालकों का कोरम जरूरी है, और वह पूरा नहीं हो पा रहा है। इस वजह से कांग्रेस के सतेज पाटील के पैनल के सामने अड़चन खड़ी हो गई है।
इसी पृष्ठभूमि में हसन मुश्रीफ ने कहा कि गोकुल के अध्यक्ष का चुनाव बिना विरोध और आपसी सहमति से होना चाहिए, और इसके लिए सतेज पाटील ही फॉर्मूला दें। मुश्रीफ ने यह भी कहा कि हमने उन्हें रोका नहीं है। अब कोल्हापुर के लोगों समेत पूरे सियासी हलके की नजर इस पर है कि सतेज पाटील क्या रुख लेते हैं।
कोरम के बारे में मुश्रीफ ने कहा, "कानून के मुताबिक अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 संचालकों का कोरम चाहिए। हमारे पास 12 संचालक हैं, इसलिए हमें दो और संचालकों की जरूरत है। समविचारी गठबंधन को बहुमत मिला है, फिर भी वह भी 14 का आंकड़ा नहीं छू सका। इस अड़चन को दूर करने के लिए सरकार ने पांच सरकार-नियुक्त संचालक नियुक्त करने का फैसला किया है। कोरम पूरा नहीं हो रहा था, इसलिए मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया है।"
बताया जा रहा है कि राज्य मंत्रिमंडल ने गोकुल के संचालक मंडल में सरकार-नियुक्त सदस्य रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत चार गैर-सरकारी और एक सरकारी सदस्य की नियुक्ति का फैसला हुआ है। जानकारी के मुताबिक इनमें से चार गैर-सरकारी सदस्यों को वोट देने का अधिकार देने का प्रावधान है। इसी वजह से अध्यक्ष के चुनाव के सियासी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। अब यह उत्सुकता है कि चुनाव में किसका पलड़ा भारी होगा और सतेज पाटील मुश्रीफ की पेशकश का क्या जवाब देंगे।
इस बीच एडवोकेट श्रीकृष्ण गणबावले ने जानकारी दी है कि गोकुल में सत्ता परिवर्तन रोकने के लिए अध्यादेश लाने की कोशिश की गई, तो वह कानून की कसौटी पर नहीं टिकेगा। गणबावले के मुताबिक पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने चेतावनी दी है कि ऐसा अध्यादेश निकालना मनमानी हो सकता है। गणबावले का दावा है कि सरकार-नियुक्त या स्वीकृत संचालकों को वोट का अधिकार देने के फैसले पर भी गवई ने कानूनी आपत्ति दर्ज की है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।