शनिवार, 7 नवंबर 2026

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गोकुल पर पांच संचालक: फडणवीस बोले, शिंदे और सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद आया प्रस्ताव

गोकुल पर पांच संचालक: फडणवीस बोले, शिंदे और सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद आया प्रस्ताव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गोकुल दूध संघ में पांच संचालक नियुक्त करने का फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद लिया गया। उन्होंने सरकार के कब्जे की बात को गलत बताया।

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध संघ, यानी गोकुल दूध संघ के चुनाव के बाद चल रही हलचल से राज्य की राजनीति गरमा गई है। राज्य सरकार ने गोकुल पर पांच संचालक नियुक्त करने का फैसला किया है। इस पर शिंदे गुट ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी। शिंदे गुट ने कहा था कि गोकुल में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनता के फैसले को मानना चाहिए।

शिंदे गुट की इस प्रतिक्रिया पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने जवाब दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की सहमति से लिया गया।

गोकुल के चुनाव में सतेज पाटील के पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं। महायुति को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा और वह 12 सीटें ही जीत सकी। इसके बाद संचालक चुनने की उलझन और बढ़ गई। अब सरकार ने पांच संचालक नियुक्त कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

आज दोपहर पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा, "कोरम पूरा न हो तो अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सकता। अगर एक गुट बहिष्कार करे या गैरहाजिर रहे, तो अध्यक्ष नहीं चुना जा सकता। अध्यक्ष चुनाव के दिन एक गुट गैरहाजिर रहा, इसलिए वह चुनाव नहीं हो पाया। मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ने 10 तारीख को चुनाव कराने को कहा है। लेकिन कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि 10 तारीख को कोरम न हो तो बिना कोरम के चुनाव करा लो। इसलिए यह चुनाव नहीं हो सकेगा। गोकुल का कानून और नियम देखें तो तीन बार इस तरह चुनाव न हो पाए, तो सारे अधिकार DDR के पास चले जाएंगे। फिर चुने हुए सदस्यों के पास वे अधिकार नहीं रहेंगे। इसलिए कोरम पूरा हो सके, इसके लिए कुछ लोगों को वोट का अधिकार देकर अध्यक्ष चुनने का यह कानून बनाया गया है।"

फडणवीस ने बताया कि यह कानूनी सवाल खड़ा होने से दोनों तरफ कोरम पूरा करने लायक वोट नहीं हैं। कोरम पूरा करने के लिए ही यह फैसला किया गया है। उनके मुताबिक यह धारणा गलत है कि राज्य सरकार गोकुल पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि गोकुल का चुनाव एक जिले तक सीमित है। कुछ तालुकों में गोकुल का असर है, इसलिए एक संस्था के लिए राज्य सरकार बेचैन है, ऐसा कुछ नहीं है।

फडणवीस ने यह भी कहा कि सरकार को यह सब करने की जरूरत नहीं है। अगर दोनों गुट बैठकर फैसला कर लें, तो इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी। सतेज पाटील और हसन मुश्रीफ के गुट मिलकर फैसला करें, तो सरकार किसी को नहीं भेजेगी। उन्होंने साफ किया कि सरकार को सिर्फ अपनी वैधानिक जिम्मेदारी निभानी है।

उन्होंने कहा कि कोरम के बिना बार-बार बैठक टलती रही, तो सारे अधिकार फिर सरकार के पास आ जाएंगे। फडणवीस के मुताबिक सरकार को कब्जा ही करना होता, तो वह DDR के जरिए आगे की कार्रवाई करती। उन्होंने कहा कि गोकुल कोई बड़ी संस्था नहीं है और उस पर कब्जा करने में राज्य सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं है। गोकुल के चुनाव को राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है, और दोनों गुट आपस में बैठकर इसका हल निकालें।

फडणवीस ने बताया कि फैसले के वक्त भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस और जनसुराज्य पक्ष ने एक साथ आकर कहा कि गोकुल में इस तरह की वैधानिक उलझन है। इसके बाद महाअधिवक्ता और विधि एवं न्याय विभाग से चर्चा की गई। उनके अनुसार जो प्रस्ताव आया, वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार और खुद उनके, यानी तीनों की चर्चा के बाद आया। फडणवीस ने कहा कि यह फैसला सरकार के तौर पर लिया जा रहा है, इसलिए किसी भी पार्टी की रजामंदी या नाराजगी का सवाल नहीं है।

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