गोकुल विवाद में रोहित पवार का फडणवीस को खुला पत्र, सरकारी संचालकों की नियुक्ति पर सवाल
राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक रोहित पवार ने गोकुल दूध संघ में चार संचालक नियुक्त करने के फैसले पर मुख्यमंत्री फडणवीस को खुला पत्र लिखा है।
गोकुल दूध संघ का मुद्दा इन दिनों राज्य की राजनीति में खूब चर्चा में है। सरकार ने संघ में चार संचालक नियुक्त करने का फैसला किया है और इसी पर विपक्ष राज्य सरकार को घेर रहा है। अब इस विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक रोहित पवार भी उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुला पत्र लिखकर सरकार के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
रोहित पवार ने यह पत्र अपने आधिकारिक X अकाउंट से मुख्यमंत्री फडणवीस के नाम लिखा है। पत्र में उन्होंने गोकुल में चल रही राजनीति पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि नागपुर में मुख्यमंत्री "अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ" मोर्चे में शामिल हो रहे हैं, तो पहले उन्हें अपने फैसलों पर खुद सोचना चाहिए।
रोहित पवार का सवाल है कि गोकुल के चुनाव में किसानों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुना दिया था। इसके बावजूद सरकार ने अपनी तरफ से संचालक नियुक्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने पूछा कि क्या यह लोकतंत्र और संविधान के साथ द्रोह नहीं है।
पत्र में रोहित पवार ने लिखा कि गोकुल में किसानों ने साफ जनादेश देकर भाजपा को दूर कर दिया, फिर भी सरकार की तरफ से सदस्य नियुक्त करके गोकुल पर कब्जा करने की मंशा क्या अराजकता नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि लोकतंत्र के नाम पर मोर्चा निकालने का नैतिक अधिकार मुख्यमंत्री के पास है या नहीं। उनके मुताबिक ये सवाल मुख्यमंत्री को अपने अंतर्मन से पूछने चाहिए।
रोहित पवार ने पत्र में यह टिप्पणी भी की कि गोकुल के नतीजे वाले दिन मुख्यमंत्री कोल्हापुर में मौजूद थे, फिर भी विजय जुलूस नहीं निकाल सके, इसलिए उनका अहं आहत होना स्वाभाविक हो सकता है। लेकिन उन्होंने सवाल किया कि अहं आहत हुआ तो इसके नाम पर संविधान के साथ छेड़छाड़ करने का हक आपको किसने दिया। रोहित पवार ने इस फैसले को "विनाश काले विपरीत बुद्धि" बताया और कहा कि अभी वक्त है, इसलिए फैसले में सुधार कर लिया जाए। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ सतेज पाटील को भी टैग किया है।
गोकुल दूध संघ के चुनाव में सतेज पाटील की अगुवाई वाले गठबंधन ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं, जबकि महायुति को 12 सीटें मिली थीं। इसके बाद अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में पेच फंस गया। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने चार संचालक नियुक्त करने का फैसला लिया। सतेज पाटील समेत विपक्ष इस फैसले का विरोध कर रहा है और अब रोहित पवार ने भी इसमें सुधार की मांग की है।
इस तरह गोकुल का मामला अब सिर्फ कोल्हापुर तक सीमित नहीं रहा। राज्य के विपक्षी दलों के नेता भी इस मामले पर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस आलोचना का क्या जवाब देते हैं।
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