गोकुळ चुनाव में सतेज पाटील के पैनल को 25 में से 14 सीटें, नावीद मुश्रीफ हारे
कोल्हापुर के गोकुळ दूध संघ के चुनाव में कांग्रेस विधायक सतेज पाटील के पैनल ने 25 में से 14 सीटें जीतीं। मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे नावीद मुश्रीफ चुनाव हार गए।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कोल्हापुर जिले के गोकुल दूध संघ के चुनाव का नतीजा आ गया है। कांग्रेस के विधायक सतेज पाटील के पैनल ने कुल 25 में से 14 सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव पर पूरे राज्य की राजनीति की नजर थी।
चुनाव में तस्वीर कुछ ऐसी थी कि एक तरफ राज्य की सत्ताधारी महायुति के तीन बड़े मंत्री, दो सांसद और जिले के महायुति विधायक थे। दूसरी तरफ कांग्रेस के अकेले विधायक सतेज पाटील थे। इस लड़ाई में मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर बताई गई। महायुति के नेताओं ने मिलकर पूरी ताकत लगाई, जबकि सतेज पाटील ने विपक्ष की ओर से जोरदार मुकाबला किया। इस तरह यह चुनाव सिर्फ दूध संघ तक सीमित नहीं रहा और सत्ताधारी और विपक्ष के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया।
सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे नावीद मुश्रीफ की हार की है। नावीद गोकुल के पूर्व चेयरमैन हैं। गोकुल की बागडोर हसन मुश्रीफ के हाथ में है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस चुनाव की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी थी। नावीद के साथ कुछ वरिष्ठ संचालक भी हारे हैं। इस नतीजे के राजनीतिक मतलब अब महायुति के खेमे में निकाले जा रहे हैं, और आगे के समीकरणों के लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है। इस पूरी लड़ाई में सतेज पाटील की रणनीति निर्णायक रही और वही इस चुनाव के किंगमेकर माने जा रहे हैं।
प्रचार के दौरान सतेज पाटील ने कहा था कि "बिना आवाज का बम फूटेगा", यानी बिना आवाज का बम फूटेगा। नतीजे के बाद उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में फिर याद किया गया। उनके समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया।
उधर मंत्री चंद्रकांत पाटील ने गोकुल में मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा था कि महायुति 25 की 25 सीटें जीतेगी। महायुति के सभी नेताओं ने पूरे आत्मविश्वास से संकेत दिया था कि गोकुल पर उन्हीं की पकड़ है। लेकिन नतीजे से दिखता है कि प्रस्ताव धारक मतदाताओं ने महायुति के नेताओं को जमीन पर ला दिया।
चुनाव के दौरान शपथ, गंडा-धागा और देवताओं की तस्वीरों पर भंडारा लगाकर वोट के लिए दबाव डालने के आरोपों की भी खुलकर चर्चा हुई। कई जिम्मेदार सभासदों ने इन शपथों के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी। इसी माहौल में प्रस्ताव धारकों का फैसला इस चुनाव का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है।
अब गोकुल की सत्ता के समीकरणों का हिसाब नए सिरे से लगेगा। महायुति की संयुक्त ताकत के सामने सतेज पाटील की टक्कर और नावीद मुश्रीफ समेत वरिष्ठ संचालकों की हार से जिले का राजनीतिक माहौल आगे अलग मोड़ ले सकता है। सबकी नजर इस पर है कि इस चुनाव के बाद कोल्हापुर की राजनीति में कौन से नए समीकरण बनते हैं।