गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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E100 फ्लेक्स-फ्युएल गाड़ियों के सर्टिफिकेशन का रास्ता खुला, नियमों में बदलाव

E100 फ्लेक्स-फ्युएल गाड़ियों के सर्टिफिकेशन का रास्ता खुला, नियमों में बदलाव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बदलाव कर E85 और E100 फ्लेक्स-फ्युएल वाहनों के प्रमाणपत्र की गुंजाइश बनाई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद E85 और E100 फ्लेक्स-फ्युएल वाहनों के प्रमाणपत्र के लिए नियमों में जगह बन गई है। यानी ज्यादा इथेनॉल वाले फ्युल पर चलने वाली गाड़ियों को भारत में मंजूरी लेने का अलग रास्ता मिल गया है। इससे ऐसी गाड़ियों के लॉन्च की प्रक्रिया को रफ्तार मिल सकती है। लेकिन नियम बदलने का मतलब यह नहीं कि गाड़ियों की बिक्री फौरन शुरू हो जाएगी।

अब सवाल यह है कि E85 और E100 फ्युल आखिर हैं क्या। E85 में ज्यादा से ज्यादा 85% इथेनॉल हो सकता है। E100 को लगभग शुद्ध इथेनॉल वाला फ्युल कहा जाता है। इसके लागू ईंधन मानक के हिसाब से इसमें करीब 93 से 95% इथेनॉल और थोड़ा पेट्रोल हो सकता है। इस फ्युल के लिए जरूरी है कि इंजन और फ्युल सिस्टम इतने इथेनॉल को झेल सकें, ऐसी उनकी बनावट हो। इसीलिए आम पेट्रोल कार में जिस तरह पेट्रोल डलवाते हैं, उस तरह E85 या E100 डलवाना हर बार मुमकिन नहीं।

क्या आम पेट्रोल कार में यह फ्युल चलेगा? फिलहाल E10 या E20 ईंधन के लिए प्रमाणित हर कार अपने आप E85 या E100 के लायक नहीं होती। फ्लेक्स-फ्युएल गाड़ियों में ऐसी सिस्टम हो सकती है जो ईंधन में इथेनॉल की मात्रा पहचानकर इंजन की सेटिंग बदल दे। फ्युल के संपर्क में आने वाले पुर्जे भी ऐसी सामग्री के बनाने पड़ते हैं जो ज्यादा इथेनॉल का सामना कर सके। इसलिए हर मॉडल के लिए कंपनी को साफ बताना होगा कि उसने किस फ्युल को मंजूरी दी है। गाड़ी पर भी इसकी पहचान दिखानी पड़ेगी।

नई नियमावली में उत्सर्जन प्रमाणपत्र के लिए जरूरी जांचें भी शामिल हैं। इनमें गैसीय प्रदूषक, इंजन चालू रहते हुए निष्क्रिय हालत का उत्सर्जन और ऑनबोर्ड डायग्नोस्टिक्स का ध्यान रखा जाता है। इथेनॉल की मात्रा बदलने पर इंजन के जलने की प्रक्रिया में भी फर्क आ सकता है। इसीलिए गाड़ी की इंजन मैनेजमेंट सिस्टम, ईंधन के पुर्जे और उत्सर्जन नियंत्रण व्यवस्था को उस फ्युल के हिसाब से तैयार करना अहम है।

तो भारत में E100 गाड़ियां कब लॉन्च होंगी? नियमों में बदलाव से E100 वाहनों का प्रमाणपत्र पाने के लिए नियामक रास्ता मिला है। मगर असली लॉन्च की तारीख या देशभर में E100 फ्युल मिलने का वक्त साफ नहीं है। फ्युल कंपनियों को पंपों पर यह ईंधन उपलब्ध कराने के लिए अलग से तैयारी करनी होगी। इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ा तो कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। फिर भी पर्यावरण पर कुल असर इस पर टिका है कि इथेनॉल किस कच्चे माल से और किस तरीके से बनाया जाता है। यह सवाल अभी बना हुआ है।

कुल मिलाकर E100 फ्लेक्स-फ्युएल गाड़ी ऐसी गाड़ी है जो ज्यादा इथेनॉल वाला ईंधन इस्तेमाल करने के लिए बनाई गई हो। E10 या E20 के लिए प्रमाणित आम कार E100 के लायक अपने आप नहीं होती। इसके लिए गाड़ी का इंजन, फ्युल सिस्टम और संबंधित पुर्जे E100 के लिए तैयार और प्रमाणित होने जरूरी हैं।

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