दिव्यांगों के लिए 16 योजनाएं, जिला योजना की 1 प्रतिशत निधि से 218 करोड़ रुपये मिलेंगे
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राज्य सरकार ने जिला वार्षिक योजना की अधिकतम 1 प्रतिशत निधि दिव्यांगों की 16 योजनाओं के लिए रखी है। मंत्री अतुल सावे के मुताबिक 2026-27 में सभी जिलों से करीब 218 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे।
राज्य सरकार ने जिला वार्षिक योजना (सामान्य) के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण, पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए अधिकतम 1 प्रतिशत निधि अलग रखी है। इस निधि से 16 तरह की योजनाएं चलाने का तरीका भी तय कर दिया गया है। इस बारे में सरकारी आदेश जारी हो चुका है।
दिव्यांग कल्याण मंत्री अतुल सावे ने बताया कि इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों के पात्र दिव्यांगों को ई-वाहन, ई-बाइक, ई-व्हीलचेयर, डिजिटल साधन, बाल देखभाल निधि, कौशल प्रशिक्षण और सुगम्य सुविधाओं के लिए आर्थिक मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य के सभी जिलों से मिलाकर अनुमानित 218 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे।
सरकार ने यह फैसला दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 और महाराष्ट्र राज्य की दिव्यांग नीति, 2018 को असरदार ढंग से लागू करने और दिव्यांगों का सामाजिक समावेशन बढ़ाने के लिए लिया है। जिला वार्षिक योजना की नियमित योजनाओं की निधि में से अधिकतम 1 प्रतिशत रकम 2025-26 से आरक्षित रखने को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। मंत्री सावे के मुताबिक यह निधि दिव्यांगों के जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर जरूरी सेवाओं, साधनों और अधिकारों की लगातार कड़ी उपलब्ध कराने में लगेगी।
पात्र दिव्यांगों को ई-वाहन के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये या ई-बाइक के लिए डेढ़ लाख रुपये की मदद मिलेगी। चलने-फिरने में दिक्कत वाले दिव्यांगों को ई-व्हीलचेयर के लिए एक लाख रुपये तक दिए जाएंगे। इन वाहनों की खरीद के अनुबंध में तीन साल का देखभाल और मरम्मत खर्च भी शामिल रहेगा।
इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढ़ाई कर रहे दिव्यांग विद्यार्थियों को टैब या टॉकिंग लैपटॉप दिया जाएगा, जबकि आठवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों को स्क्रीन रीडर मिलेगा। इसके लिए अधिकतम 75 हजार रुपये की सीमा तय की गई है। नेत्रहीन दिव्यांगों के लिए स्मार्ट ग्लासेस, स्मार्ट केन, लो विजन किट, ब्रेल लर्निंग किट, टॉकिंग वॉच, टॉकिंग कैलकुलेटर और सेंसर वाले चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। कर्णबधिर विद्यार्थियों के लिए वीडियो ट्यूटोरियल होंगे। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए काम कर रही शैक्षणिक संस्थाओं को डिजिटल शैक्षणिक साहित्य के सेट के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी।
दिव्यांगों के लिए बनी आधुनिक तकनीक और सहायक उपकरणों की जिला स्तरीय प्रदर्शनी के लिए हर साल अधिकतम 10 लाख रुपये का प्रावधान है। इन प्रदर्शनियों में स्थानीय स्टार्टअप उपकरणों का प्रदर्शन और तकनीकी प्रस्तुति कर सकेंगे, साथ ही लाभार्थियों और सरकारी संस्थाओं से बातचीत का मौका भी पाएंगे।
यूनिवर्सल डिसेबिलिटी आइडेंटिटी कार्ड यानी यूडीआईडी कार्ड बनवाने के लिए जांच पर आने वाले पात्र व्यक्ति को एक बार 1 हजार रुपये तक का यात्रा खर्च मिलेगा। हर जिले और तहसील स्तर पर साल में कम से कम एक विशेष शिविर लगेगा। इस शिविर में यूडीआईडी कार्ड, बस पास, स्वास्थ्य जांच और दूसरी जरूरी सेवाएं एक ही जगह मिलेंगी। इन शिविरों पर हर जिला सालाना अधिकतम 10 लाख रुपये खर्च कर सकेगा।
दिव्यांगों को पहले दिए जा चुके आवास में सुगम्य शौचालय या कमोड बनवाने, मरम्मत और दूसरे सुगम्यता के कामों के लिए एक बार अधिकतम 25 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। सरकारी स्कूल और कॉलेजों में दिव्यांग लड़के-लड़कियों के लिए खास सुगम्य शौचालय, रैंप और जरूरी सुविधाएं बनाने पर नए निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये और मरम्मत के लिए डेढ़ लाख रुपये तक दिए जा सकेंगे।
दिव्यांग विद्यार्थियों और युवाओं को रोजगार लायक हुनर मिले, इसके लिए अल्प अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स, लंबी अवधि या व्यावसायिक कोर्स, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और दूसरे सरकार से मान्य प्रशिक्षण में आर्थिक मदद मिलेगी। अल्प अवधि के कोर्स के लिए 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। लंबी अवधि के कोर्स, आईटीआई और दूसरे सरकार से मान्य व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 50 हजार रुपये तक या असल खर्च, इनमें से जो कम हो, वह रकम मिलेगी।
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