शनिवार, 7 नवंबर 2026

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दिल्ली के जोड़े ने धनुषकोडी में खरीदीं मछलियां और समुद्र में छोड़ दीं, सोशल मीडिया पर बहस

दिल्ली के जोड़े ने धनुषकोडी में खरीदीं मछलियां और समुद्र में छोड़ दीं, सोशल मीडिया पर बहस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
समाज PT24 टीम

तमिलनाडु के धनुषकोडी बीच पर दिल्ली के एक जोड़े ने मछुआरों से 5 किलो जिंदा मछलियां खरीदकर समुद्र में छोड़ दीं। किसी ने इसे दया कहा, किसी ने बेकार का कदम।

दिल्ली के एक जोड़े ने समुद्र की मछलियों को बचाने के लिए एक अलग तरह का तरीका अपनाया, और अब वे ऑनलाइन बहस के बीच आ गए हैं। जोड़ा तमिलनाडु के धनुषकोडी बीच पर गया था। वहां उसने स्थानीय मछुआरों से 5 किलो जिंदा मछलियां खरीदीं और उन्हें वापस समुद्र में छोड़ दिया।

इस घटना का दावा एक ट्विटर पोस्ट में किया गया है। पोस्ट के साथ एक वीडियो भी है, जिसमें एक महिला भावुक होकर मछलियों को वापस पानी में छोड़ती दिख रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले इस पर दो खेमों में बंट गए हैं। कुछ को यह दयालु काम लगा, जबकि कुछ को बेकार का कदम। वीडियो शेयर करने वाले यूजर ने जोड़े के फैसले की आलोचना की। उसने लिखा कि दिल्ली के एक जोड़े ने धनुषकोडी बीच पर मछुआरों से 5 किलो जिंदा मछलियां खरीदीं और उन्हें फिर समुद्र में छोड़ दिया। इसके बाद उसने तंज किया कि समुद्र को इस 'दान' से कोई फायदा नहीं है, उलटे लगता है कि आपके दिमाग को थोड़ी ऑक्सीजन की जरूरत है, और सामान्य ज्ञान हर किसी के पास नहीं होता।

पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने यह सवाल उठाया कि मछुआरों से मछलियां खरीदकर उन्हें उसी समुद्र में छोड़ देने से क्या सच में कोई फर्क पड़ता है।

एक यूजर ने टिप्पणी की कि मछलियां खरीदीं, समुद्र में छोड़ दीं और इसे 'बचाव अभियान' का नाम दे दिया। उसके मुताबिक मछुआरों को पैसे मिल गए, जोड़े को लगा कि वह 'तारणहार' है, और सामान्य ज्ञान पानी में डूब गया।

दूसरी तरफ एक यूजर ने जोड़े का बचाव किया। उसने कहा कि यह उनकी अपनी इच्छा है, और शायद मछलियां बचाकर उन्हें खुशी मिलती हो। उसने माना कि हो सकता है ये मछलियां फिर किसी दूसरे मछुआरे के जाल में फंस जाएं या दूसरे शिकारी जीवों का निवाला बन जाएं। फिर भी उसका सवाल था कि अगर इनमें से एक भी मछली बच गई और उसने समुद्र में अपनी पूरी उम्र जी ली, तो? उसके मुताबिक शायद जोड़े का मकसद यही रहा होगा। उसने कहा कि उनका नजरिया समझे बिना उन्हें ट्रोल नहीं करना चाहिए, और कम से कम अब उन्हें चैन की नींद आएगी, क्योंकि उन्होंने इन मछलियों को जीने का दूसरा मौका दिया है।

एक तीसरे यूजर ने सवाल किया, "यह गुस्सा किसलिए? गुस्सा तो उन पर होना चाहिए जिन्होंने जानवरों को मारा या उन्हें चोट पहुंचाई, न कि उन पर जिन्होंने उन जानवरों को छुड़ाया। इसमें गलत क्या है? और अगर दूसरे जानवरों को उन्हें खाने की तैयारी कर रहे लोगों के चंगुल से बचाया गया होता, तो क्या तब भी आप ऐसी ही हमदर्दी और फिक्र दिखाते?"

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