कस्तुरबा अस्पताल परिसर में दिखा दुर्लभ इंडियन पिट्टा, डॉ. मंगेश पवार ने देखा नवरंग
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के कस्तुरबा अस्पताल के परिसर में रंग-बिरंगा इंडियन पिट्टा दिखा। नायर अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन और पक्षी निरीक्षक डॉ. मंगेश पवार ने इसे शनिवार सुबह देखा।
मुंबई के कस्तुरबा अस्पताल के परिसर में एक दुर्लभ और रंग-बिरंगा पक्षी इंडियन पिट्टा दिखाई दिया है, जिसे नवरंग भी कहा जाता है। अस्पताल में मरीजों की भीड़, इलाज की भागदौड़ और लगातार चहल-पहल के बीच यह पक्षी सबको सुखद हैरानी दे गया।
यह पक्षी नायर अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. मंगेश पवार की नजर में आया। डॉ. पवार को कस्तुरबा के बर्न वॉर्ड में ड्यूटी करनी पड़ती है। शनिवार सुबह वे वहां गए हुए थे, तभी उन्हें नवरंग दिखा। डॉ. पवार खुद पक्षी निरीक्षक हैं और राज्य में अलग-अलग जगह जाकर पक्षियों का अध्ययन करते रहते हैं। उनके इस निरीक्षण से पक्षीप्रेमियों में उत्साह है।
इंडियन पिट्टा अपने बहुरंगी पंखों की वजह से नवरंग के नाम से जाना जाता है। हरे, नीले, पीले, नारंगी, लाल और काले रंगों की आकर्षक छटाओं वाला यह पक्षी देखने में बेहद सुंदर होता है। आम तौर पर यह घनी झाड़ियों और जंगल के इलाकों में मिलता है, इसलिए मुंबई के भीड़भाड़ वाले मध्य भाग में एक अस्पताल के परिसर में उसका दिखना खास तौर पर ध्यान खींचने वाला है।
इंडियन पिट्टा मुख्य रूप से केरल और श्रीलंका में पाया जाता है। कोंकण और पश्चिमी घाट के इलाके में भी वह कभी-कभार ही दिखता है। इन दिनों इस पक्षी के प्रवास का समय चल रहा है और वह मुंबई के पास कर्नाला इलाके तक आता है। डॉ. पवार ने कहा कि कर्नाला से आगे बढ़कर सीधे मुंबई के मध्य भाग में कस्तुरबा अस्पताल के परिसर में उसका दिखना एक खास बात है।
महानगर में पक्षियों के प्रवास, उनके आवास और पर्यावरण में आ रहे बदलावों की दृष्टि से इस दर्ज की गई घटना का अध्ययन होना जरूरी होगा।
डॉ. पवार ने कहा, "मुंबई जैसे भीड़भाड़ वाले शहर में इंडियन पिट्टा दिखेगा, और वह भी कस्तुरबा अस्पताल के परिसर में, इसका बिल्कुल अंदाजा नहीं था। अस्पताल के रोज के कामकाज के बीच अचानक इस नौ रंगों के मेहमान के दर्शन हुए। उसके रंग और सुंदरता देखकर पल भर के लिए नजर हटती ही नहीं थी। प्रकृति हमें ऐसे अनपेक्षित पलों में खुशी की सौगात देती है, यह एक अविस्मरणीय अनुभव है।"
इस दर्शन ने शहर के पेड़ों, हरियाली और पक्षियों के अनुकूल प्राकृतिक आवास को बचाए रखने के महत्त्व को फिर रेखांकित किया है। कंक्रीट के जंगल में भी प्रकृति ने अपना अस्तित्व बचाए रखा है, इसका सुखद एहसास नवरंग ने कराया है।
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