दिवाली में पटाखों से आंखों को चोट का खतरा, डॉ. वंदना जैन ने बताईं सावधानियां
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
डॉ. अग्रवाल्स आय हॉस्पिटल की डॉ. वंदना जैन के मुताबिक पटाखों से आंखों की चोट मामूली जलन से लेकर हमेशा के लिए नजर जाने तक हो सकती है।
दिवाली आते ही घर-घर में खुशी का माहौल बन जाता है। लोग दिये जलाते हैं, घर सजाते हैं, मिठाई खाते हैं और पटाखे फोड़ते हैं। रोशनी का यह त्योहार परिवार और दोस्तों को एक साथ लाता है। लेकिन इसी जोश में पटाखों से होने वाले खतरों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जानकारी के मुताबिक दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले हादसों में आंखों को गंभीर चोट लगने के मामले ज्यादा होते हैं, और हर साल पटाखों से आंखों की चोट धीरे-धीरे बढ़ती दिख रही है।
डॉ. अग्रवाल्स आय हॉस्पिटल की चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर और हेड ऑफ क्लिनिकल सर्विसेज डॉ. वंदना जैन कहती हैं, "दिवाली खुशी और जश्न का वक्त है, फिर भी इस जोश में आंखों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पटाखों से आंखों की चोट मामूली जलन और जलने से लेकर नजर पर हमेशा के लिए असर डालने वाली गंभीर चोट तक हो सकती है। बच्चों पर बड़ों को हमेशा नजर रखनी चाहिए, पटाखे सिर्फ खुली जगह में फोड़ने चाहिए और सबको सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए। आंख में चोट लगे तो आंखें न मलें और घरेलू इलाज न करें, फौरन डॉक्टरी मदद लें। थोड़ी सी सावधानी रखी जाए तो दिवाली की खुशी सबके लिए सुरक्षित और मजेदार रह सकती है।"
आंख शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक है। पटाखे की छोटी सी चिंगारी या कण भी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। खतरा सिर्फ पटाखा फोड़ने वाले को नहीं, आसपास खड़े लोगों को भी होता है।
जारी जानकारी में दिवाली के दौरान आंखों को होने वाली आम चोटों का ब्योरा दिया गया है। इनमें कॉर्निया पर खरोंच है, यानी आंख की पारदर्शक बाहरी परत पर पटाखे के छोटे कण, राख या चिंगारी का असर, जिससे दर्द, लालिमा, आंख से पानी आना और रोशनी न सह पाने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। धमाके के तेज दबाव से आंख के अंदर की बनावट को गंभीर नुकसान होकर आंख का गोला फट सकता है। गर्म चिंगारी या लपटों से पलकें, पलकों के बाल और आंख की सतह जल सकती है। गर्मी या केमिकल से आंख के सफेद हिस्से की पतली झिल्ली (कंजंक्टिवा) को भी चोट पहुंच सकती है।
धूल, राख, पटाखों के अवशेष या धमाके से उड़े कण आंख में चले जाएं तो जलन और दूसरा गंभीर नुकसान हो सकता है। धमाके से आंख की नाजुक रक्तवाहिनियां क्षतिग्रस्त होकर अंदर खून बह सकता है। तेज धमाके से रेटिना को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिससे नजर धुंधली पड़ने या हमेशा के लिए नजर जाने का खतरा रहता है। ज्यादा केमिकल वाले पटाखों का पदार्थ आंख में जाए तो जलन या जलने की चोट हो सकती है।
बचाव के लिए इस जानकारी में कहा गया है कि पटाखे खुली जगह में फोड़े जाएं, सुरक्षा के उपकरण इस्तेमाल हों और पटाखे छूने के बाद हाथ साफ पानी से धोए जाएं। पटाखा जलाते वक्त हाथ भर की दूरी रखी जाए और उसे देखते वक्त कम से कम पांच मीटर दूर रहा जाए। पटाखे चेहरे के पास न पकड़े जाएं और उन पर झुककर न देखा जाए। बाहर निकलने से पहले कॉन्टैक्ट लेंस निकाल दिए जाएं, सिंथेटिक कपड़े न पहने जाएं और ठीक से जूते-चप्पल पहने जाएं।
इस्तेमाल हो चुके पटाखों को फेंकने से पहले पानी की बाल्टी में भिगोकर पूरी तरह बेकार कर देना चाहिए। पटाखे चेहरे, बालों और कपड़ों से दूर रखे जाएं। अचानक आग लगने पर काम आने के लिए पानी और रेत की बाल्टी पास रखी जाए। पटाखे बंद डिब्बे में, बच्चों की पहुंच से दूर रखे जाएं। जो पटाखा नहीं फूटा, उसे हाथ में लेने की कोशिश न की जाए, क्योंकि वह अचानक जल सकता है। उसके पास फौरन न जाएं और उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें। पटाखे छूने के बाद आंखें और चेहरा साफ पानी से अच्छी तरह धोएं, और बच्चों को बड़ों की देखरेख के बिना पटाखे न फोड़ने दें।
आंख में चोट लगने पर फौरन डॉक्टरी मदद लेने को कहा गया है। फिर भी नजर बचाने के लिए कुछ शुरुआती बातें काम की बताई गई हैं। धुएं, धूल या राख से जलन हो तो आंखें न मलें, क्योंकि इससे जलन बढ़ सकती है और चोट ज्यादा हो सकती है। आंखों को कम से कम 20 मिनट साफ पानी से धोएं, और जलन कम न हो तो डॉक्टर की सलाह लें। हाथ साफ धोए बिना आंखों को न छुएं। आंख में गए कण या बाहरी चीज को खुद निकालने की कोशिश न करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई मरहम, आई ड्रॉप्स या घरेलू नुस्खा इस्तेमाल न करें।
आंख में कुछ घुस जाने या आंख में छेद होने का शक हो तो आंख को न धोएं और न दबाएं। आंख पर बिना कोई दबाव डाले सख्त सुरक्षा कवच रखकर फौरन इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। चोट मामूली लगे या नजर सामान्य हो, तब भी मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। पटाखे के हादसे के बाद दर्द, लालिमा, धुंधला दिखना, रोशनी न सह पाना या आंख से लगातार पानी आना जैसे लक्षण दिखें तो फौरन नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।