दिवाली में सड़क पर पटाखे फोड़े तो होगी कार्रवाई, विदेशी पटाखों की बिक्री पर भी रोक
दिवाली से पहले महाराष्ट्र में पटाखों को लेकर नए नियम जारी हुए हैं। सड़कों, फुटपाथ और अस्पताल जैसी जगहों के पास पटाखे फोड़ना मना है।
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दिवाली अब कुछ ही दिन दूर है। इस त्योहार पर देशभर में बड़े पैमाने पर पटाखे फोड़े जाते हैं और कई जगह पटाखों की दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बार आतिशबाजी करने के लिए पुलिस के कुछ नियम मानने होंगे। त्योहार के दौरान पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ पर्यावरण से जुड़ी एजेंसियां भी तैयार हैं।
पटाखे फोड़ने और अस्थायी तौर पर बेचने के लिए नियमावली जारी की गई है। सार्वजनिक जगहों, सड़कों, फुटपाथ और गली-मोहल्लों में पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगाई गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इन नियमों को तोड़ने वालों पर केस दर्ज किया जाएगा।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और मुंबई महापालिका ने लोगों से नियम मानने की अपील की है। मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
नियमावली के मुताबिक सड़क, फुटपाथ और गली में, और सड़क से 10 मीटर के अंदर पटाखे फोड़ना मना है। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाओं, सरकारी दफ्तरों और अदालतों से 100 मीटर के दायरे में भी पटाखे फोड़ने पर बंदी है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आवाज करने वाले पटाखों पर रोक रहेगी। त्योहार और जुलूसों में लेजर, तेज रोशनी वाली लाइटें और बीम लाइट के इस्तेमाल पर भी पाबंदी है। लोगों से कहा गया है कि पटाखे फोड़ने से पहले स्थानीय नियम जान लें और सुरक्षा के लिए जरूरी दूरी रखें।
ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कार्यक्रमों में आवाज का स्तर नापने वाले उपकरण जरूरी करने पर जोर दिया गया है। निजी जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों को भी तय ध्वनि सीमा माननी होगी। लोगों से कहा गया है कि तय वक्त में कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन पटाखे ही फोड़ें।
नियम तोड़ने पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, फौजदारी और विस्फोटक पदार्थों से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। नियम तोड़ने की शिकायत MPCB के 'महा पर्यावरण' ऐप पर दर्ज की जा सकती है। इस बीच आवाज फाउंडेशन ने दावा किया है कि ग्रीन पटाखों में भी जहरीली भारी धातुएं मिली हैं। संस्था ने सभी तरह के पटाखों पर बैन लगाने की मांग की है।
खबर है कि मुंबई उच्च न्यायालय ने पाबंदियों पर ठीक से अमल न होने को लेकर प्रशासन से नाराजगी जताई है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि कुछ पुलिस अफसरों ने कहा कि उन्हें इन पाबंदियों की जानकारी नहीं थी। इस मामले में 26 अक्टूबर को मुंबई महापालिका, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और पुलिस प्रमुखों को अदालत में हाजिर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्थायी पटाखा बिक्री के लिए 6 नवंबर से 5 दिसंबर 2026 तक की अवधि के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे। लाइसेंस की मियाद खत्म होने के बाद विक्रेता पटाखे नहीं बेच सकेंगे। बचा हुआ स्टॉक अधिकृत गोदाम में या थोक लाइसेंस वाले को लौटाना जरूरी होगा। अस्थायी पटाखा स्टॉल से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी करना मना है। विदेशी बनावट के पटाखे बेचने पर भी रोक है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण नियमों के मुताबिक पटाखों की आवाज पर सीमा तय की गई है। पटाखा फोड़ने की जगह से चार मीटर की दूरी पर 125 डेसिबल से ज्यादा आवाज करने वाले पटाखों का उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल मना है। 100 से ज्यादा पटाखों वाली चेन बम (लड़ी) पर बैन है। एक खास आकार के 'ऐटम बम' पर भी कानूनी पाबंदी रहेगी।
कुल मिलाकर दिवाली मनाते वक्त ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचना, नियम मानना और सार्वजनिक सुरक्षा को पहले रखना जरूरी है। पटाखे अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें और स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं का पालन करें।
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