गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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05:57 IST

ध्रुव राठी, अभिजीत दीपके और प्रकाश राज एक वीडियो में, 8 और 10 अक्टूबर के आंदोलन का आह्वान

यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिजीत दीपके और अभिनेता प्रकाश राज ने साथ आकर बंगलुरू और दिल्ली के आंदोलन के लिए लोगों से आने को कहा है।

ध्रुव राठी, अभिजीत दीपके और प्रकाश राज एक वीडियो में, 8 और 10 अक्टूबर के आंदोलन का आह्वान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट ने मिलकर एक वीडियो जारी किया है। इसमें अभिजीत दीपके और ध्रुव राठी एक साथ नज़र आते हैं। इनके साथ जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज भी वीडियो में दिखाई देते हैं।

यह वीडियो ऐसे वक्त आया है जब विशेष चुनाव पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर देश का सियासी माहौल गरम है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई विपक्षी पार्टियां, सामाजिक संगठन और युवाओं के गुट आंदोलन कर रहे हैं। इसी माहौल में ध्रुव राठी, अभिजीत दीपके और प्रकाश राज एक ही आंदोलन के बहाने एक मंच पर आए हैं।

वीडियो में ध्रुव राठी ने लोगों से अपील की है कि वे 8 अक्टूबर को बंगलुरू के फ्रीडम पार्क में होने वाले आंदोलन में "लोकतंत्र को बचाने के लिए" पहुंचें। फ्रीडम पार्क में उसी दिन SIR के खिलाफ आंदोलन के साथ पीपल्स ट्रिब्यूनल का भी आयोजन किया गया है। राठी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर होने वाले इसी आंदोलन में भी आने को कहा है। जंतर मंतर पर यह आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए होगा।

प्रकाश राज ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन के लिए लोगों को पुकारा है। उन्होंने यह बात "आली रे आली, अब तेरी बारी आली" जैसे मज़ाकिया बॉलीवुड अंदाज़ में कही। ध्रुव राठी के आंदोलन में शामिल होने की जानकारी प्रकाश राज ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये दी।

ध्रुव राठी की मौजूदगी को कई वजहों से अहम माना जा रहा है। बड़ी वजह यह बताई गई है कि वे केंद्र की भाजपा और मोदी सरकार की नीतियों की अपने यूट्यूब वीडियो में पहले भी कई बार खुलकर आलोचना कर चुके हैं। यूट्यूब पर उनके 2 करोड़ से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं और इंस्टाग्राम पर भी करीब 2 करोड़ फॉलोअर्स हैं।

इसी वजह से कहा जा रहा है कि उनके शामिल होने से आंदोलन की जानकारी सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पहुंच सकती है और नौजवानों का ध्यान भी इसकी तरफ जा सकता है। इसका असर आंदोलन की पूरी दिशा पर पड़ सकता है, ऐसा माना जा रहा है। अब सबकी नज़र 8 अक्टूबर को बंगलुरू और 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले आंदोलनों पर टिकी है।

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