गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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05:08 IST

पीसीपीएनडीटी कानून में बदलाव होगा, लिंग जांच करने वालों पर मोक्का की तैयारी: आबिटकर

स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि गर्भ में लिंग जांच कर भ्रूण हत्या करने वाले डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई के लिए कानून में सुधार जरूरी है। सुधार विधेयक शीतकालीन अधिवेशन में पेश होगा।

पीसीपीएनडीटी कानून में बदलाव होगा, लिंग जांच करने वालों पर मोक्का की तैयारी: आबिटकर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गर्भ में लिंग जांच कर स्त्री भ्रूण हत्या करने वाले डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई के लिए कानून में बदलाव जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि गर्भधारणा पूर्व व प्रसूति पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिबंध) कानून 1994 और 2003 में सुधार किया जाएगा। इसके लिए आने वाले शीतकालीन अधिवेशन में सुधार विधेयक पेश किया जाएगा।

मंत्री के मुताबिक ऐसे अपराध करने वाले डॉक्टरों पर लगने वाली धाराएं और कड़ी करनी होंगी। इसके साथ अपराधियों पर मकोका लगाना, अपराध साबित करने की प्रक्रिया और सजा में भी बदलाव करना जरूरी है। बार-बार यही गुनाह करने वालों पर मकोका लगाने की बात भी सामने आई है।

आबिटकर यह बात राज्यस्तरीय कृति दल की पहली बैठक में बोल रहे थे। यह दल इसी कानून पर सख्ती से अमल कराने के लिए बनाया गया है। बैठक मंत्रालय में आबिटकर की अध्यक्षता में हुई। कृति दल की अध्यक्ष विधायक डॉ. नीलम गोऱ्हे, सदस्य विधायक मनीषा कायंदे, विधायक उमा खापरे, विधायक स्नेहा दुबे-पंडित और स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर बैठक में मौजूद थे।

आबिटकर ने कहा कि राज्यस्तरीय कृति दल का काम जिला स्तर तक पहुंचना चाहिए, ताकि जिलों से शिकायतें आ सकें। इसके लिए समिति का समयबद्ध कार्यक्रम तय किया जाए। साथ ही इस काम के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की एक समर्पित टीम तय की जाए।

जिनका पंजीकरण नहीं है, ऐसे बोगस डॉक्टरों की सूची बनाकर प्रसिद्ध की जाए। इससे आम लोगों को इन डॉक्टरों की जानकारी मिलेगी और जनता भी उन पर नजर रखेगी। मंत्री आबिटकर ने ऐसे बोगस डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में सोनोग्राफी के लिए पोर्टेबल मशीनें मिल रही हैं और ऐसे विज्ञापन गूगल पर दिखते हैं। इस बारे में सर्वे कर ऐसे उत्पादों पर पाबंदी लगाई जाए। इसके अलावा जानवरों के लिए इस्तेमाल होने वाली सोनोग्राफी मशीन का उपयोग इंसानों के लिए तो नहीं हो रहा, इसकी जांच भी की जाए।

जिलास्तरीय समितियों की समीक्षा के लिए शीतकालीन अधिवेशन से पहले सभी जिलों में बैठकें ली जाएं, ऐसी सूचना भी आबिटकर ने दी। कानून के बारे में जनजागरण करने वालों को ज्यादा सक्षम और कारगर बनाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने को भी उन्होंने कहा।

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