लाडकी बहन: सितंबर से 2100 रुपये के दावे का कोई सरकारी आधार नहीं, अभी अगस्त के 1500 रुपये
सोशल मीडिया पर चल रहे 2100 रुपये के हप्ते और 5 अक्टूबर के नए शासन निर्णय के दावे पर प्रशासन की सफाई सामने आई है।
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'मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन' योजना को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर एक मैसेज खूब घूम रहा है। इस दावे के मुताबिक सितंबर महीने से लाभार्थी महिलाओं के खाते में सीधे 2100 रुपये का हप्ता जमा होगा, और इसके लिए 5 अक्टूबर को एक नया शासन निर्णय (GR) भी जारी हो चुका है। इस मैसेज की वजह से राज्य की लाखों महिलाओं में उत्सुकता भी है और उलझन भी। अब देखते हैं कि इसके पीछे सच क्या है।
पहले यह समझ लें कि अभी खातों में क्या आ रहा है। राज्य सरकार ने पात्र लाभार्थी महिलाओं को अगस्त 2026 का आर्थिक लाभ देने के लिए 339 करोड़ 14 लाख रुपये का फंड उपलब्ध कराया है। सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग ने इसका आधिकारिक आदेश जारी करके यह रकम महिला व बालविकास विभाग को सौंप दी है।
इस योजना के अनुसूचित जाति घटक के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कुल 3 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी प्रावधान में से सिर्फ अगस्त महीने के 1500 रुपये देने के लिए ऊपर बताया गया फंड बांटा गया है।
फंड के वितरण को लेकर प्रशासन ने काफी सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। यह पक्का करने की पूरी जिम्मेदारी महिला व बालविकास विभाग पर डाली गई है कि योजना का फायदा सिर्फ असली और पात्र महिलाओं को ही मिल रहा है। विभाग से यह भी कहा गया है कि मिला हुआ फंड सिर्फ इसी श्रेणी की पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसका ध्यान रखा जाए। यानी यह रकम कोई बढ़ा हुआ हप्ता नहीं है, यह सिर्फ अगस्त महीने का नियमित लाभ है।
अब 2100 रुपये के दावे की बात। इस वक्त महिलाओं के खाते में जो 1500 रुपये आ रहे हैं, वे अगस्त महीने के हैं। इसलिए यह कहने का कोई अधिकृत और कानूनी आधार नहीं है कि इसके बाद सितंबर का हप्ता सीधे 2100 रुपये मिलेगा। 5 अक्टूबर को सितंबर के हप्ते के लिए, या योजना की मासिक रकम 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये करने के लिए, कोई शासन निर्णय जारी नहीं हुआ है। ऐसे में सोशल मीडिया पर घूम रहे इस तरह के भ्रामक संदेशों पर महिलाओं को बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए।
प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि आगे चलकर योजना की रकम बढ़ाने का या सितंबर के हप्ते को लेकर कोई भी फैसला होता है, तो उसकी घोषणा सिर्फ अधिकृत शासन निर्णय के जरिए ही की जाएगी।