शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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देहू नगरपंचायत के नोटिस के बाद भी इंद्रायणी नदी से नहीं हटा मलबा, येलवाडी के किसान परेशान

देहू नगरपंचायत के नोटिस के बाद भी इंद्रायणी नदी से नहीं हटा मलबा, येलवाडी के किसान परेशान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

भामा आसखेड जलवाहिनी के काम के दौरान इंद्रायणी में डाला गया मलबा जावळे कन्स्ट्रक्शन को नोटिस मिलने के बाद भी जस का तस है।

देहूगांव में भामा आसखेड जलवाहिनी प्रोजेक्ट के काम के दौरान इंद्रायणी नदी में डाला गया मलबा अब तक नहीं हटाया गया है। देहू नगरपंचायत ने जावळे कन्स्ट्रक्शन को मलबा हटाकर नदी को पहले जैसा करने का नोटिस दिया था। इसके बावजूद मलबा वहीं पड़ा है, और यह अब साफ दिख रहा है क्योंकि नदी का पानी कम हो गया है। इसी वजह से नागरिक मांग कर रहे हैं कि नगरपंचायत इस ठेकेदार पर कार्रवाई करे।

देहू नगरपंचायत की हद में साई चौक से वडाचा माळ के बीच एक पुल है। इसी पुल के पास भामा आसखेड जलवाहिनी प्रोजेक्ट के तहत पाइपलाइन डालने का काम जावळे कन्स्ट्रक्शन को सौंपा गया था। काम चलने के दौरान नदी में बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मुरम डाला गया। इसके अलावा जेसीबी से नदी के अंदर गहरी खुदाई भी की गई थी।

पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद नदी में डाला गया मलबा और निर्माण का बचा हुआ सामान पूरी तरह हटाना जरूरी था। आरोप है कि ठेकेदार ने सिर्फ कुछ मिट्टी निकालकर उसके ढेर नदी किनारे लगा दिए। नदी की पूरी मिट्टी और बाकी अवशेष नहीं हटाए गए। अब पानी घटा तो नदी के अंदर का मलबा खुले में नजर आने लगा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मलबे की वजह से इंद्रायणी का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है। नतीजा यह है कि येलवाडी इलाके के खेतों में पानी घुस रहा है और किसानों को नुकसान हो रहा है, ऐसी शिकायत है। जून महीने में भारी बारिश से इंद्रायणी में बाढ़ आई थी। उस बाढ़ के पानी से किनारे पर डाली गई मिट्टी भी बहकर वापस नदी में मिल गई। इससे मलबा हटाने का सवाल और गंभीर हो गया है।

नगरपंचायत ने 24 जून 2026 को नोटिस देकर ठेकेदार को निर्देश दिया था कि नदी का मलबा, निर्माण सामग्री और बाकी अवशेष तुरंत हटाकर नदी साफ की जाए। नोटिस मिलने के दो दिन के अंदर काम पूरा करना था। साथ ही की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट फोटो के साथ नगरपंचायत में जमा करने का आदेश भी दिया गया था।

नोटिस में नगरपंचायत ने यह भी लिखा था कि मलबा और निर्माण सामग्री नहीं हटी तो नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आ सकती है। नदी के सारे अवशेष हटाकर उसे पहले जैसा करना ठेकेदार की जिम्मेदारी है, यह बात भी नोटिस में साफ कही गई थी। फिर भी ठेकेदार ने नोटिस को कोई तवज्जो नहीं दी, ऐसा मौके की हालत से दिखता है।

अब देहूगांव के नागरिकों और येलवाडी के किसानों की नजर इस पर है कि नोटिस के निर्देश न मानने पर नगरपंचायत ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। वे यह भी देख रहे हैं कि नदी को पहले जैसा करने के लिए प्रशासन खुद आगे आएगा या नहीं।

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