गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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अमेरिका-इराण तनाव चरम पर, खाड़ी में फौज बढ़ी और होर्मुज में टैंकरों पर हमले

अमेरिका-इराण तनाव चरम पर, खाड़ी में फौज बढ़ी और होर्मुज में टैंकरों पर हमले तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिका और इराण की फौजें आमने-सामने हैं। इराण की गुप्त सुरंगों में एटम बम बनाने की जल्दबाजी का दावा किया जा रहा है, जबकि होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों पर हमले हुए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब तक के सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दोनों देशों की फौजें आमने-सामने आ गई हैं और मध्य पूर्व में बड़ी जंग के संकेत मिल रहे हैं। ईरान के नए नेतृत्व और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (IRGC) ने अपने नागरिकों को संभावित आपातकाल और जंग के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है।

दावा किया जा रहा है कि ईरान अपनी गुप्त पहाड़ी सुरंगों में तेजी से एटम बम बनाने की कोशिश कर रहा है। इस जल्दबाजी में सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों को किनारे रख दिया गया है, जिससे बहुत गंभीर परमाणु हादसे का खतरा खड़ा हो गया है। गुप्तचर रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के बहुत ऊंचाई पर बने पिकैक्स (PICEX) पहाड़ की सुरंगों में रहस्यमय हलचल चल रही है। ये सुरंगें जमीन के सैकड़ों फुट नीचे हैं और बंकर-बस्टर बम से भी इन्हें भेदना मुश्किल माना जाता है। सैन्य जानकारों के मुताबिक इस लापरवाही की वजह से तेज रेडिएशन फैलने या बड़े धमाके का डर है।

ईरान के आम लोगों में दहशत है। उन्होंने अनाज, दवाइयां और जरूरी सामान का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। बताया गया है कि IRGC की तरफ से जनता को मानसिक तौर पर परमाणु तबाही के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है। यह संशय भी जताया गया है कि अगर एटम बम बनाने के दौरान कोई हादसा हुआ, तो ईरान उसका दोष सीधे अमेरिकी हमले पर डालने की योजना बना रहा है।

दूसरी तरफ अमेरिका ने खाड़ी देशों में अपनी फौजी मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम से लैस मालवाहक विमान, आधुनिक लड़ाकू विमान और मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिटें ईरान की सरहद के पास तैनात की गई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद इस इलाके में फौजी हलचल तेज हुई है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चर्चा है कि ईरान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए अमेरिका किसी भी वक्त बड़ा फौजी हमला कर सकता है।

हवाई जंग की बात करें तो अमेरिकी फौज ने ईरान पर सटीक और तेज हमलों के लिए अपने सबसे आधुनिक F-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैयार रखा है। ये विमान रडार को चकमा देने में माहिर हैं। इसके जवाब में ईरान ने '358' नाम की एक अनोखी और घातक मिसाइल तैनात की है। यह मिसाइल पारंपरिक रडार पर निर्भर नहीं रहती। यह पैसिव इन्फ्रारेड सेंसर (Passive Infrared Sensors) का इस्तेमाल करती है और विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी (Thermal Signature) का पीछा करती है।

बताया गया है कि '358' मिसाइल दागे जाने के बाद करीब 60 मिनट तक हवा में चक्कर काट सकती है, इसलिए वह हवा में बिछी बारूदी सुरंग (Airborne Mine) की तरह काम करती है। 640 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह मिसाइल F-35 के रडार पर भी नजर नहीं आती। पायलट को इसका अंदाजा बिल्कुल आखिरी पल में होता है, इसलिए बचाव बेहद मुश्किल हो जाता है। फटने पर यह मिसाइल गोली जैसे सैकड़ों छर्रे बाहर फेंकती है, जो F-35 जैसे मजबूत लड़ाकू विमान की ढाल भी आसानी से भेदकर तबाही मचा सकते हैं।

दुनिया की 30 फीसदी से ज्यादा तेल ढुलाई जिस होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से होती है, वहां हालात बहुत गंभीर हैं। अक्टूबर महीने में इस इलाके में 28 से ज्यादा तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं और खाड़ी में 115 से ज्यादा जहाज अटके पड़े हैं। ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर कंट्रोल पाने की कोशिश की है, जिससे दुनिया की ईंधन सप्लाई चेन खतरे में आ गई है।

इन हालात से निपटने के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपनी नौसेना और मरीन कॉर्प्स की टुकड़ियों को कड़ा अभ्यास करने का आदेश दिया है। अमेरिकी कमांडो सुरंगों में घुसकर यूरेनियम जब्त करने और आमने-सामने की लड़ाई (Hand-to-Hand Combat) की प्रैक्टिस में जुटे हैं। इसके अलावा हेलिकॉप्टर से ईरानी द्वीपों पर कब्जा करने की मॉक-ड्रिल भी की जा रही है। ट्रम्प के मुताबिक इस संकट से भले ही कुछ वक्त परेशानी हो, लेकिन ईरान पर निर्णायक कार्रवाई किए बिना दुनिया का तेल बाजार पटरी पर नहीं लौट सकता।

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