अमेरिका की सवाना रिवर नेशनल लैबोरेटरी में आग, इमरजेंसी घोषित, बाहर कोई रिसाव नहीं
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अमेरिका के साउथ कैरोलिना राज्य में अमेरिकी ऊर्जा विभाग की सवाना रिवर नेशनल लैबोरेटरी में शाम को आग लगी। दो घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया और सुविधा के बाहर किसी रेडियोलॉजिकल या खतरनाक पदार्थ के रिसाव की खबर नहीं है।
अमेरिका के साउथ कैरोलिना राज्य की सवाना रिवर नेशनल लैबोरेटरी (Savannah River National Laboratory, SRNL) में अचानक आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह अमेरिकी ऊर्जा विभाग (Department of Energy) का एक अहम परिसर माना जाता है। घटना शाम करीब 5:39 बजे की है।
आग की खबर मिलते ही प्रशासन ने तुरंत 'साइट एरिया इमरजेंसी' (Site Area Emergency) यानी आपातकाल का ऐलान कर दिया। इस केंद्र में परमाणु हथियार बनाने और परमाणु रिसर्च का काम होता है, इसलिए आग की बात फैलते ही आसपास रहने वाले लोगों में चिंता का माहौल बन गया।
घटना के बाद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी सेवाएं मौके पर पहुंच गईं। फायर ब्रिगेड के जवानों ने लगातार कोशिश करके करीब दो घंटे के अंदर आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इसके बाद पूरे प्रभावित इलाके की बारीकी से जांच की गई। सिक्योरिटी अफसरों ने राहत भरी जानकारी दी कि सुविधा के बाहर किसी रेडियोलॉजिकल या खतरनाक पदार्थ का कोई रिसाव नहीं हुआ है। हालात पूरी तरह काबू में आने के बाद घोषित की गई इमरजेंसी आधिकारिक तौर पर वापस ले ली गई।
आग की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फौरन सख्त सुरक्षा इंतजाम लागू किए। एहतियात के तौर पर सवाना रिवर साइट (SRS) परिसर के मुख्य गेट बंद कर दिए गए और बाहर से आने वाली सभी गाड़ियों की एंट्री पर पूरी रोक लगा दी गई। इसके अलावा इस इलाके के ऊपर से गुजरने वाली हवाई आवाजाही, स्थानीय रेलवे सेवा और सवाना नदी में जहाजों की आवाजाही को भी कुछ समय के लिए रोका गया था।
सुरक्षा अभियान या इमरजेंसी मैनेजमेंट के लिए जिन कर्मचारियों की जरूरत नहीं थी, उन सभी को सुरक्षित जगह पर रहने (Shelter-in-place) के निर्देश दिए गए। केंद्र सरकार की अलग-अलग इमरजेंसी एजेंसियां, स्थानीय पुलिस और राज्य के मानवाधिकार विशेषज्ञ हालात पर लगातार नजर रखे हुए थे। अफवाहें न फैलें, इसके लिए स्थानीय लोगों से अपील की गई कि वे सिर्फ आधिकारिक रेडियो, टीवी न्यूज चैनलों और सरकारी अपडेट पर भरोसा करें।
आइकेन शहर के पास स्थित सवाना रिवर साइट सिर्फ एक आम रिसर्च लैब नहीं है। इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य ताकत का एक मुख्य आधार बताया गया है। इस परिसर को 1950 के दशक में शीत युद्ध (Cold War) के दौरान बनाया गया था। 75 साल से ज्यादा समय से यह सुविधा अमेरिका के परमाणु हथियार कार्यक्रमों और रणनीतिक सैन्य अभियानों को तकनीकी ताकत देती आ रही है।
शुरुआती दौर में इस ऐतिहासिक सुविधा में पांच मुख्य परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactors) चलते थे। परमाणु बम और हाइड्रोजन बम बनाने के लिए जरूरी बेहद खतरनाक रासायनिक तत्व, खासकर ट्रिटियम (Tritium) और प्लूटोनियम-239 (Plutonium-239), इसी केंद्र में तैयार किए जाते थे। परमाणु ईंधन को शुद्ध करने वाले दो बड़े केमिकल सेपरेशन प्लांट (Chemical Separation Plants) भी यहीं बनाए गए थे।
आज के समय में इस केंद्र का इस्तेमाल मुख्य रूप से परमाणु सामग्री को संभालने, परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर रिसर्च करने और पुराने परमाणु प्रोजेक्टों से निकले रेडियोएक्टिव कचरे (Radioactive Waste) को सुरक्षित तरीके से मैनेज करने के लिए होता है। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने, खतरनाक कचरे के निपटारे और आसपास की प्रकृति को रेडिएशन से बचाने के लिए यहां कई सफाई अभियान (Environmental Cleanup Operations) चलाए जाते हैं।
इस घटना में न किसी की जान गई और न ही रेडिएशन फैला। फिर भी परमाणु हथियार बनाने वाली इस संवेदनशील सुविधा में आग आखिर कैसे लगी, इसकी असली वजह पता करने के लिए अमेरिकी ऊर्जा विभाग (U.S. Department of Energy) ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
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