भाजपा विधायक गोपीचंद पडळकर ने धनगर आरक्षण और सहकारी क्षेत्र पर सरकार को घेरा
कवठेमहांकाळ के आरेवाडी में हिंदू बहुजन दशहरा मेले में पडळकर ने धनगर एसटी आरक्षण, जिला बैंक और सहकारी चीनी कारखानों पर अपनी बात रखी।
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भाजपा के विधायक गोपीचंद पडळकर ने धनगर समाज के एसटी आरक्षण से लेकर सहकारी क्षेत्र में कथित गड़बड़ियों तक कई मुद्दे उठाए और राज्य सरकार व सहकारी क्षेत्र के कामकाज की तीखी आलोचना की। वे कवठेमहांकाळ तालुका के आरेवाडी में बिरोबा के बन में हुए हिंदू बहुजन दशहरा मेले में बोल रहे थे। उन्होंने धनगर एसटी आरक्षण के लिए अदालती लड़ाई तेज करने का इरादा जताया। साथ ही कहा कि जिला बैंक किसान सदस्यों के फायदे के लिए काम करने वाली होनी चाहिए।
पडळकर ने कहा कि धनगर आरक्षण का सवाल उनकी जिंदगी का सबसे अहम मुद्दा है। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में समाज का पक्ष मजबूती से रखने के लिए राज्य सरकार को फौरन अपना जवाब दाखिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला उलटा आया तो अगली लड़ाई की तैयारी भी रखनी पड़ेगी। इसके लिए 15 नवंबर को पुणे में धनगर समाज के जानकारों, अध्ययन करने वालों, पढ़े-लिखे नौजवानों और बुजुर्गों की बैठक होगी। उन्होंने अपील की कि लोग सिर्फ आलोचना करने न आएं, बल्कि आरक्षण की लड़ाई की आगे की दिशा तय करने के लिए ठोस कार्ययोजना लेकर आएं।
सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पडळकर ने कहा कि बैंक किसान सदस्यों के पैसे से खड़ी हुई संस्था है और उसका फायदा आम किसानों और उनके परिवारों को मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े कर्जदारों को करोड़ों रुपये के कर्ज मिल जाते हैं, जबकि आम किसानों को कर्ज के लिए बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं। उन्होंने बैंक की नौकरी भर्ती में पैसे मांगे जाने का भी आरोप लगाया और मांग की कि भर्ती मेरिट पर हो। इन आरोपों पर बैंक प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये करने की मांग की। उन्होंने यह सुझाव भी रखा कि पढ़ाई के लिए सांगली में रहने वाले किसान सदस्यों के बच्चों को हर महीने एक हजार रुपये कमरे का किराया देने की योजना चलाई जाए।
सहकारी चीनी कारखानों को लेकर भी पडळकर ने बात रखी। जत चीनी कारखाने के बारे में उन्होंने करीब 40 करोड़ रुपये में कारखाना दिए जाने के कथित सौदे पर स्पष्टीकरण मांगा। तासगांव और नागेवाडी कारखानों की बिक्री के सौदों की उन्होंने आलोचना की। आटपाडी के मानगंगा सहकारी चीनी कारखाने से जुड़े जमीन के सौदे पर उन्होंने आपत्ति जताई। जिला बैंक की भर्ती में उम्मीदवारों से 20 से 30 लाख रुपये लिए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया।
पडळकर ने महाराजा यशवंतराव होळकर की जयंती पर पुणे में भव्य महोत्सव करने की अपील की। उन्होंने मांग की कि यशवंतराव होळकर के जन्मस्थान वाफगांव के किले का संरक्षण राज्य सरकार करे, किला निजी संस्था से लेकर सरकार अपने कब्जे में ले और इसके लिए अलग किला संवर्धन समिति बने। किले पर महाराजा यशवंतराव होळकर के लायक भव्य स्मारक बनाने की बात भी उन्होंने कही। अंग्रेजों से लड़ने वाले वीर शिबग्रोबा धनगर का नाम कनेक्टिंग लिंक को देने की मांग की। उन्होंने विधानभवन के प्रांगण में वरिष्ठ नेता गणपतराव देशमुख की प्रतिमा लगाने और उनके नाम पर आदर्श विधायक पुरस्कार शुरू करने की मांग भी की।
धार्मिक स्थलों के बारे में पडळकर ने मांग की कि आरेवाडी के बिरोबा देवस्थान, पट्टणकोडोली की यात्रा, वाशी की बिरोबा यात्रा और धुळोबा देवस्थान के विकास के लिए पंढरपुर की यात्रा जैसी सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने बताया कि बिरोबा देवस्थान परिसर के विकास के लिए पहले करीब 149 करोड़ रुपये का प्लान बना था। उनका दावा है कि इसमें से 109 करोड़ रुपये का फंड राज्य सरकार के योजना विभाग के जरिए मंजूर करने की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। उन्होंने कहा कि परिसर में श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और सरकारी व्यवस्था खड़ी करने की जरूरत है।
पट्टणकोडोली की यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले परांडे बाबा को यात्रा के दौरान पुलिस सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं देने की मांग भी उन्होंने की। बाळूमामा मंदिर के प्रबंधन के लिए अलग कानून बनाकर 21 सदस्यों की समिति बनाई जाए, उसके अध्यक्ष भेड़पालक समाज के व्यक्ति हों और समिति में इस समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिले, यह भी उन्होंने कहा। पडळकर ने महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा के इलाके में बसवेश्वर कॉरिडॉर विकसित करने की मांग की और कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास के लिए योजना बनाकर कदम उठाए।
पडळकर ने इस मेले के जरिए समाज के अलग-अलग तबकों से संगठित होकर सहकारी संस्थाएं, मजदूर संस्थाएं और प्रोसेसिंग उद्योग खड़े करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की आर्थिक तरक्की के लिए सिर्फ राजनीतिक संघर्ष काफी नहीं है, आर्थिक संस्थाएं खड़ी करना भी अहम है। सूखे के बारे में उनके भाषण में विस्तृत जायजा नहीं था, पर सांगली जिले समेत राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए उन्होंने मांग की। इसमें पानी की किल्लत से जूझते गांवों में नियमित पानी की सप्लाई, जरूरत के मुताबिक टैंकर, चारा प्रबंधन, फसल नुकसान की भरपाई, पानी का भंडारण और भेड़पालक व दूसरे पशुपालकों के पानी-चारे के लिए खास योजना शामिल है।