बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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बाळापूर तालुके में पानी का संकट गहराया, नदियां-तालाब सूखे, गांवों में 8-10 दिन नल बंद

बाळापूर तालुके में पानी का संकट गहराया, नदियां-तालाब सूखे, गांवों में 8-10 दिन नल बंद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

बाळापूर तालुके में मन, महेश और भिकुंड नदियों का जलस्तर गिर गया है। गांवों में 8 से 10 दिन तक नल में पानी नहीं आ रहा और मन नदी में जलपर्णी व विसर्जन की गंदगी से नागरिक नाराज हैं।

अकोला जिले के बाळापूर तालुके में पानी का सवाल बहुत गंभीर हो गया है। ग्रामीण इलाकों समेत पूरे तालुके में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। तालुके के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली मन, महेश और भिकुंड, इन तीन मुख्य नदियों में से मन नदी पर बने सिर्फ दो प्रमुख बांध छोड़ दें, तो बाकी नदियां, छोटे बंधारे और तालाब तल तक पहुंच गए हैं।

इसका सीधा असर गांवों पर पड़ा है। कई गांवों में पूरे 8 से 10 दिन तक नल में पानी नहीं आता, इसलिए लोगों को तीव्र पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। नदी में पानी का स्तर वैसे ही कम हो गया है और ऊपर से पूरी नदी में जलपर्णी की बेलों ने जकड़ रखा है। इसी बीच हाल ही में गणेशोत्सव और उसके फौरन बाद नवरात्रोत्सव धूमधाम से मनाया गया।

बाळापूर में बायपास रोड से राष्ट्रीय महामार्ग पर मन नदी के पुल के ऊपर से पिछले दो दिनों से क्रेन की मदद से माँ दुर्गादेवी का विसर्जन किया जा रहा है। अकोला जिले के साथ पड़ोसी बुलढाणा जिले से भी सैकड़ों गणेश और देवी मंडल विसर्जन के लिए बाळापूर आते हैं। पहले से ही पानी की किल्लत और जलपर्णी की मार झेल रही मन नदी में सैकड़ों बड़ी मूर्तियां विसर्जित होने से हालत बहुत खराब हो गई है। मूर्तियों का आकार बड़ा है और नदी में जरूरत भर पानी नहीं है, इसलिए कई देवी मूर्तियां पानी पर तैरती या आधी डूबी हुई दिख रही हैं।

इसके अलावा, नौ दिन श्रद्धा से पूजा करने के बाद जमा हुआ निर्माल्य सीधे नदी में डाला जा रहा है। इससे नदी में हर तरफ गंदगी फैल गई है। इस पूरी स्थिति पर नागरिकों में गुस्सा है। उनका कहना है कि उनके इलाके में पहले ही 10-10 दिन नल में पानी नहीं आता और पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ऊपर से मन नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। विसर्जन से नदी में भारी मात्रा में गंदगी और निर्माल्य जमा हो गया है। नागरिकों की मांग है कि प्रशासन फौरन ध्यान देकर नदी की सफाई करे, वरना आने वाले समय में सेहत का बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा।

पानी की कमी के बावजूद कोई ठीक वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया, इसलिए आगे का जल संकट और गहरा होने वाला है। मौजूदा हालात देखते हुए अगली गर्मियों में बाळापूर तालुके को भीषण पानी की किल्लत झेलनी पड़ने की प्रबल आशंका है। एक तरफ भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, तो दूसरी तरफ नदियों का प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

इसलिए मन नदी से जलपर्णी फौरन हटाना, विसर्जन स्थल पर जमा निर्माल्य और कचरा साफ कर नदी की सफाई का अभियान चलाना, और आगे का पानी संकट टालने के लिए जलसंधारण के काम तुरंत हाथ में लेना जरूरी हो गया है। कहा जा रहा है कि अगर स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर मामले पर फौरन ध्यान नहीं दिया, तो लोगों का तीव्र आक्रोश भड़क सकता है।

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