अनिल देशमुख ने राज्यपाल को भेजा स्मरणपत्र, चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट जाहिर करने की मांग
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महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि 1400 पन्नों की रिपोर्ट सौंपे साढ़े चार साल से ज्यादा हो गए, फिर भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने उसे सार्वजनिक नहीं किया।
महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने राज्यपाल को स्मरणपत्र भेजकर मांग की है कि जस्टिस चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। देशमुख ने इस मामले में संवैधानिक दखल की भी मांग की है। उन्होंने रिपोर्ट अब तक जाहिर न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मामला अनिल देशमुख पर लगे 100 करोड़ रुपये के कथित आरोपों से जुड़ा है। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार ने मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के. यू. चांदीवाल की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया था। करीब 13 महीने जांच करने के बाद आयोग ने 1400 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।
देशमुख का कहना है कि रिपोर्ट सौंपे साढ़े चार साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया। इसी वजह से उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल को स्मरणपत्र लिखा है।
पत्र के मुताबिक देशमुख ने 16 जून 2026 को राज्यपाल के पास शिकायत अर्जी दी थी। इसके अलावा वे मुख्यमंत्री कार्यालय को अब तक 15 से ज्यादा पत्र भेज चुके हैं। 19 अक्टूबर 2026 को उन्होंने 14वां स्मरणपत्र भेजा। देशमुख के मुताबिक मुख्यमंत्री की तरफ से न कोई ठोस कार्रवाई हुई, न कोई जवाब आया।
देशमुख ने बताया कि 16 जून और 31 जुलाई 2026 के पत्रों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामला गृह विभाग, विधि व न्याय विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के पास भेज दिया। 6 अगस्त 2026 को स्पीड पोस्ट और ई-मेल से पूछताछ की गई, फिर भी इन विभागों से कोई साफ जानकारी नहीं मिली। देशमुख ने पत्र में आरोप लगाया है कि एक विभाग से दूसरे विभाग में सिर्फ चिट्ठियां घुमाकर वक्त काटा जा रहा है।
अपनी बात रखते हुए अनिल देशमुख ने कहा, यह आयोग मुझ पर लगे कथित आरोपों की जांच के लिए बनाया गया था, इसलिए रिपोर्ट के निष्कर्ष और टिप्पणियां जानना मेरा बुनियादी हक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता और मनमानेपन के खिलाफ संरक्षण) और अनुच्छेद 19(1)(क) (जानकारी का अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी) के हिसाब से, और पारदर्शी व जवाबदेह प्रशासन के लिए भी, रिपोर्ट का जाहिर होना बेहद जरूरी है।
देशमुख ने राज्यपाल से कहा है कि वे संविधान के अनुच्छेद 153, 154, 163 और 166 के तहत अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करें और इस मामले का फौरन संज्ञान लें।
उनकी मांग है कि चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट बिना देरी सार्वजनिक करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उचित निर्देश या सूचना दी जाए। साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तय समय में फैसला लेने का आदेश दिया जाए। देशमुख ने इस पत्र की कॉपी मुख्य सचिव, गृह विभाग, विधि व न्याय विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य सचिवों को भी आगे की कार्रवाई के लिए भेजी है।
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