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रविवार, 8 नवंबर 2026

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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद रूस की नज़र ट्रम्प पर, यूक्रेन युद्ध पर क्या होगा असर

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद रूस की नज़र ट्रम्प पर, यूक्रेन युद्ध पर क्या होगा असर
डोनाल्ड ट्रम्प | फाइल फोटो | Wikimedia Commons / The White House (Public domain)
दुनिया PT24 टीम

अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा बढ़ने के बाद यूक्रेन युद्ध की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं। क्रेमलिन इसे अमेरिका का अंदरूनी मामला बता रहा है।

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव (US Midterms) के नतीजे आने के बाद दुनिया की राजनीति में बड़े बदलाव दिख रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है और डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद में दबदबा बना लिया है। अब पूरी दुनिया की नज़र इस पर है कि यूक्रेन और रूस के युद्ध की दिशा कैसे बदलेगी। रूस इन राजनीतिक घटनाओं पर बारीकी से नज़र रखे हुए है।

उम्मीद जताई जा रही है कि डेमोक्रेट्स की जीत से यूक्रेन को अमेरिका से सैन्य मदद मिलने की राह आसान होगी। फिर भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बातचीत का क्या होगा, इस पर सवालिया निशान बना हुआ है।

अमेरिका के सियासी समीकरण बदल गए हैं, लेकिन रूस को अब भी राष्ट्रपति ट्रम्प से शांति वार्ता आगे बढ़ाने की उम्मीद है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ किया कि संसद में हुआ राजनीतिक फेरबदल अमेरिका का अंदरूनी मामला है। रूस चाहता है कि चुनाव नतीजों का उन कोशिशों पर बुरा असर न पड़े, जो अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच समाधान निकालने के लिए कर रहा है।

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में रूसी, यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों की एक अहम बैठक रखी गई है। इसमें युद्ध का तनाव घटाने और कूटनीतिक समाधान निकालने पर विस्तार से चर्चा होगी। पेस्कोव ने अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प के मानवीय कामों की खुलकर तारीफ भी की। मेलानिया ट्रम्प की पहल से पिछले हफ्ते रूस के कब्ज़े वाले यूक्रेनी शहर ओलेश्की के आसपास अस्थायी युद्धविराम हो सका था। इससे प्रभावित नागरिकों तक मदद पहुंची और विस्थापित लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

पिछले कुछ महीनों में ट्रम्प प्रशासन के कई फैसले रूस के लिए राहत भरे माने गए। अमेरिका ने रूस से सीधे डीज़ल खरीदने का करार किया, जिसे सालों से रूस पर लगी आर्थिक पाबंदियों के पूरी तरह खिलाफ माना गया। ट्रम्प ने यूक्रेन से यह भी कहा था कि वह रूसी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले रोक दे। ट्रम्प का दावा था कि इन हमलों की वजह से अमेरिका में डीज़ल के दाम आसमान छू रहे हैं।

हालांकि विश्लेषकों के मुताबिक दुनिया में ऊर्जा के दाम बढ़ने की मुख्य वजह ईरान में तनाव था। अमेरिका के राष्ट्रीय हित का हवाला देकर ट्रम्प ने रूसी अर्थव्यवस्था पर नई पाबंदियां लगाना फिलहाल टाल दिया था। अमेरिका में दोनों पार्टियों के सांसदों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

इसी बीच स्टारशील्ड और डीज़ल करार को लेकर नया विवाद उठा। इलॉन मस्क की स्पेसएक्स की सैन्य इंटरनेट सेवा स्टारशील्ड की रफ्तार अचानक घटा दी गई, जो यूक्रेनी सेना के लिए बेहद अहम है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों और युद्ध के मैदान में आपसी संपर्क के लिए इसे रीढ़ माना जाता है। ट्रम्प ने इस फैसले में अपना हाथ होने से इनकार किया, पर विशेषज्ञों का अंदाज़ा है कि यह शांति वार्ता के लिए यूक्रेन पर दबाव डालने की अप्रत्यक्ष कोशिश थी।

रूस के साथ डीज़ल खरीद का करार कानूनी पचड़े में भी फंस गया है। अमेरिका के संघीय और राज्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि रूसी डीज़ल को संभालने वाली कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई होगी। इसके बाद अमेरिका की ओर निकले दो रूसी टैंकर रास्ते से ही लौट गए। रूस ने साफ कहा है कि वह डीज़ल की सप्लाई नहीं रोकेगा।

रूस के भीषण बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से पैट्रियट (Patriot Missile Defense System) मिसाइल प्रणाली की फौरन मांग की है। ईरान युद्ध में बढ़ती भागीदारी की वजह से अमेरिका का अपना हथियारों का भंडार काफी घट गया है, इसलिए ट्रम्प प्रशासन को पहले अपनी रक्षा प्रणाली मज़बूत करनी पड़ रही है।

फिर भी 30 अक्टूबर को ट्रम्प प्रशासन ने यूक्रेन को 2.1 अरब डॉलर की पैट्रियट मिसाइलें बेचने को मंजूरी दी। इससे पहले यूक्रेन ने पेंटागन पर जानबूझकर सप्लाई में देरी करने का आरोप लगाया था। ट्रम्प कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि पुतिन समझौते के लिए तैयार हैं, जबकि ज़ेलेंस्की को उन्होंने शांति की राह में बड़ी रुकावट बताने की कोशिश की है। हाल ही में ट्रम्प ने पुतिन के दूत किरिल दिमित्रीव से बात की, लेकिन उस कार्यक्रम में मौजूद यूक्रेनी प्रतिनिधियों से मिलने से बचे।

डेमोक्रेटिक पार्टी के अमेरिकी संसद पर काबू पाने के बाद अब ट्रम्प प्रशासन को अपनी नीतियां बदलनी पड़ सकती हैं। रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के मुताबिक ट्रम्प अब यूक्रेन पर सीधा दबाव डालने से बचेंगे, क्योंकि वे संसद में डेमोक्रेट्स से सीधी टक्कर नहीं चाहते।

दूसरी ओर ज़ेलेंस्की को भरोसा है कि अमेरिका में डेमोक्रेट्स के मज़बूत होने से यूक्रेन को सैन्य मदद और आर्थिक सहारा बड़े पैमाने पर मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषक अब्बास गल्यामोव का कहना है, "ट्रम्प के शुरुआती नरम रुख का फायदा उठाकर पुतिन ने समझौते का मौका गंवा दिया। अब अमेरिकी संसद के दबाव से पुतिन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।"

वहीं अटलांटिक काउंसिल के जॉन फ्लेक और रूसी सांसद कॉन्स्टैंटिन कोसाचेव के मुताबिक विदेश नीति में अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार सबसे ऊपर होते हैं। इसलिए संसद में बहुमत होने के बावजूद डेमोक्रेट्स के लिए ट्रम्प के फैसलों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।

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