होराइज़न यूरोप में भारत के शामिल होने पर यूरोपियन यूनियन से बातचीत पूरी
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भारत और यूरोपियन यूनियन ने होराइज़न यूरोप रिसर्च कार्यक्रम में भारत की औपचारिक भागीदारी की सारी बातचीत पूरी कर ली है। अब भारतीय वैज्ञानिक और संस्थाएं इसके फंड के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगी।
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच विज्ञान और तकनीक के सहयोग में एक अहम पड़ाव आ गया है। यूरोपियन यूनियन के रिसर्च और इनोवेशन कार्यक्रम होराइज़न यूरोप में भारत के औपचारिक तौर पर शामिल होने की सारी बातचीत दोनों पक्षों ने पूरी कर ली है। इससे भारतीय शोधकर्ताओं, वैज्ञानिक संस्थाओं और टेक्नोलॉजी सेक्टर के स्टार्टअप को दुनिया के स्तर पर अपनी ताकत दिखाने का बेमिसाल मौका मिला है।
पिछले कुछ सालों से भारत और यूरोपियन यूनियन व्यापार, तकनीक और विज्ञान में आपसी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। होराइज़न यूरोप में दाखिला सिर्फ एक साझेदारी नहीं है, यह भारत के रिसर्च एंड डेवलपमेंट के ढांचे के लिए नई जान की तरह है। इस कदम से भारतीय प्रतिभा और यूरोप का उन्नत रिसर्च नेटवर्क साथ आकर दुनिया की बड़ी चुनौतियों के नए हल खोज सकेंगे।
होराइज़न यूरोप यूरोपियन यूनियन का 2021 से 2027 की अवधि के लिए बना सबसे बड़ा फंडिंग कार्यक्रम है। इसका कुल बजट 93.5 अरब यूरो है। बातचीत पूरी होने के बाद भारतीय वैज्ञानिक और संस्थाएं इस फंड के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगी और यूरोपीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर बनने वाले प्रोजेक्ट की अगुवाई भी कर सकेंगी।
भारतीय शोधकर्ताओं और उद्योगों को तीन बड़े फायदे गिनाए गए हैं। पहला, भारतीय रिसर्च संस्थाओं और निजी स्टार्टअप को दुनिया के स्तर के बड़े प्रोजेक्ट के लिए सीधा फंड मिल सकेगा। दूसरा, यूरोप की मशहूर प्रयोगशालाओं, सुपरकंप्यूटिंग सेंटरों और रिसर्च के बुनियादी ढांचे में भारतीय वैज्ञानिकों को मुफ्त और सीधी पहुंच मिलेगी। तीसरा, भारत और यूरोप के शोधकर्ताओं के बीच विचारों और ज्ञान का लेन-देन बढ़ेगा, जिससे ब्रेन ड्रेन की जगह "ब्रेन गेन" होगा।
होराइज़न यूरोप के ढांचे में "स्तंभ 2" (Pillar II) सबसे बड़ा और अहम हिस्सा माना जाता है। यह मुख्य रूप से दुनिया की चुनौतियों और उद्योग की होड़ की क्षमता पर केंद्रित है। इसके विषय भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से पूरी तरह मेल खाते हैं।
साझा रिसर्च के चार मुख्य क्षेत्र बताए गए हैं। सेहत और मेडिकल रिसर्च में नई बीमारियों की दवाएं, टीके और डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशन बनाए जाएंगे। डिजिटल तकनीक, उद्योग और अंतरिक्ष में एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और उपग्रह तकनीक का विकास होगा। जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा में अक्षय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक व्हीकल और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर काम होगा। खाद्य, खेती और बायो-इकोनॉमी में टिकाऊ खेती के तरीके और खाद्य सुरक्षा पक्की करने वाले नवाचार शामिल हैं।
27 जनवरी 2026 को हुए भारत-यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन में इस संभावित भागीदारी पर शुरुआती चर्चा हुई थी। उसके बाद 15 जुलाई 2026 को ब्रुसेल्स में हुई ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की मंत्री स्तर की बैठक के बाद औपचारिक बातचीत ने रफ्तार पकड़ी। पिछले कुछ महीनों की लगातार बातचीत और बैठकों के बाद अब यह बातचीत कामयाबी से पूरी हो गई है। जल्द ही आखिरी दस्तखत करके इसे लागू करने का काम शुरू किया जाएगा।
भारत इस समय तकनीक और विज्ञान के दम पर आर्थिक तरक्की कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "विकसित भारत 2047" की सोच में देश के भीतर रिसर्च और इनोवेशन को खास अहमियत दी गई है। यूरोपियन यूनियन के इस विश्वस्तरीय रिसर्च मंच से जुड़ने पर भारतीय युवा शोधकर्ता वैश्विक मानकों के हिसाब से काम कर सकेंगे। जलवायु परिवर्तन से निपटने से लेकर उद्योग के नए हल खोजने तक हर क्षेत्र में भारत की छाप दिखेगी। यह साझेदारी सिर्फ विज्ञान तक सीमित न रहकर भारत और यूरोप के रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई देगी।


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