अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की वोटिंग शुरू, कांग्रेस पर नियंत्रण का फैसला होगा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए आज वोटिंग हो रही है। इससे तय होगा कि डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के आखिरी दो साल में कांग्रेस पर किसका नियंत्रण रहेगा।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए आज वोटिंग चल रही है। लाखों नागरिक वोट डाल रहे हैं, ताकि तय हो सके कि डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्राध्यक्ष कार्यकाल के आखिरी दो साल में कांग्रेस पर किसका कंट्रोल रहेगा।
अमेरिका का चुनाव भारत से अलग तरह का होता है। वहां लोकतंत्र तो है, लेकिन सिर्फ दो ही पार्टियां हैं, एक रिपब्लिकन और दूसरी डेमोक्रेट्स। भारत में भी लोकतंत्र है, पर वहां पार्टियों की गिनती पर कोई रोक नहीं है। अमेरिका में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए जाते हैं और चुनाव उन्हीं के नाम पर लड़ा जाता है। ये दोनों उम्मीदवार खुले मंच पर आकर सबके सामने एक दूसरे से बहस भी करते हैं।
एक बार चुनाव हो गया तो अगले चार-पांच साल कोई चुनाव नहीं, ऐसा वहां नहीं होता। आधा कार्यकाल बीतने पर मध्यावधि चुनाव कराए जाते हैं, इसलिए हर राष्ट्राध्यक्ष को दो बार वोटरों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं बातों से अमेरिका में लोकतंत्र जिंदा रहने के लिए प्रतिबद्ध होता रहता है।
ट्रम्प के लिए यह चुनाव क्यों अहम है, इस पर नजर डालें तो राष्ट्राध्यक्ष बनने के बाद से उन्होंने अमेरिका और दुनिया की राजनीति में उथल-पुथल शुरू कर दी। उन पर यह आलोचना हुई है कि उनके फैसलों से कई बार अमेरिका मुश्किल में पड़ा। अब उनके कार्यकाल के दो ही साल बचे हैं और इसके बाद वे कभी दोबारा अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष नहीं बन सकेंगे।
अमेरिका में लोगों को सबसे ज्यादा चिंता महंगाई की है। ट्रम्प का लगाया आक्रामक शुल्क और ईरान के साथ चल रही जंग नागरिकों को पसंद नहीं आई। इससे खाने-पीने की चीजों और ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ट्रम्प की लोकप्रियता घटी है। उन्होंने देशभर में दर्जनभर सभाएं करके जोरदार प्रचार किया। फिर भी बढ़ती कीमतें सभी पार्टियों के वोटरों के लिए चिंता की बात हैं।
ट्रम्प के लिए यह चुनाव बेहद अहम बताया जा रहा है। चर्चा है कि अगर वे यह चुनाव हार गए तो उन पर काफी पाबंदियां आ सकती हैं, और माहौल और बिगड़ा तो उन्हें कुर्सी तक छोड़नी पड़ सकती है।
अमेरिका की संसद कांग्रेस कहलाती है और उसके दो सदन हैं। पहला सदन प्रतिनिधि सभा है, जिसमें कुल 435 सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है और हर राज्य को आबादी के हिसाब से सीटें मिलती हैं। बजट और आर्थिक बिलों में इस सदन की अहम भूमिका होती है।
दूसरा सदन सिनेट है, जिसमें कुल 100 सदस्य होते हैं। हर राज्य से दो सिनेटर चुने जाते हैं और हर सदस्य का कार्यकाल छह साल का होता है। हर दो साल में करीब एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव होता है। राष्ट्राध्यक्ष की अहम नियुक्तियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को मंजूरी देने का अधिकार सिनेट के पास है।
दुनिया पर असर की बात करें तो कहा जा रहा है कि ट्रम्प का आगे का सफर अमेरिका जितना ही दुनिया के लिए भी मायने रखता है। चुनाव से पहले उन्होंने नो वॉर अगेन और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (Maga) जैसे नारे दिए थे। आलोचकों के मुताबिक काम उलटा हुआ। ट्रम्प ने टैरिफ वॉर छेड़ा, वेनेजुएला पर कब्जा किया, ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की इच्छा जताई और ईरान पर जंग छेड़ी। इस आकलन में यह भी कहा गया है कि उन्होंने जंग के नियम तोड़े, दुनिया के व्यापार पर तलवार लटका दी और उनके फैसलों से कई बेकसूर लोगों की जान गई।
अमेरिका में उनके चाहने वाले खुश होंगे, या कुछ फैसले अमेरिका की भलाई के लिए होंगे, पर दुनिया के हिस्से में निराशा ही आई है, ऐसा इस आकलन में कहा गया है। दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की पकड़ और दबदबा है, इसलिए उसके फैसलों का असर दूसरे देशों पर पड़ता है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।