अकोला में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए दो जगह खुलेंगे थ्रोम्बोलिसिस सेंटर
अकोला जिले में जिला स्त्री अस्पताल और मूर्तिजापुर के उपजिला अस्पताल में थ्रोम्बोलिसिस सेंटर शुरू होंगे, हर सेंटर में तीन बेड अलग रखे गए हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अकोला जिले में हार्ट अटैक के मरीजों को इमरजेंसी के वक्त समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए दो जगह थ्रोम्बोलिसिस सेंटर शुरू किए जाएंगे। ये सेंटर जिला स्त्री अस्पताल और मूर्तिजापुर के उपजिला अस्पताल में खुलेंगे। दोनों सेंटरों के लिए तीन-तीन बेड की अलग व्यवस्था की गई है।
बताया गया है कि ये सेंटर जल्द ही लोगों की सेवा में चालू हो जाएंगे। उपनिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं और जिला शल्य चिकित्सक डॉ. आरती कुलवाल के मार्गदर्शन में इसके लिए जरूरी कार्रवाई चल रही है।
इस पहल का मुख्य मकसद हार्ट अटैक की इमरजेंसी में मरीजों को फौरन इलाज उपलब्ध कराना और गंभीर पेचीदगियों से बचाना है। दोनों सेंटरों के लिए कुल 13 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है। इनमें दो फिजिशियन, चार मेडिकल ऑफिसर और सात नर्स शामिल हैं। ट्रेंड मेडिकल टीम के जरिए जरूरत के हिसाब से मरीजों को तुरंत इलाज देने की योजना बनाई गई है। इस सुविधा से जिले के मरीजों को वक्त पर इलाज मिलने में मदद होगी।
इलाज के बारे में खबर में बताया गया है कि खून की नसों में खून का थक्का बन जाने से खून के बहाव में रुकावट आ सकती है। ऐसे में खास दवाओं की मदद से इस थक्के को घोलने वाली इलाज की पद्धति को थ्रोम्बोलिसिस कहते हैं। हार्ट अटैक या दिमाग को खून की सप्लाई रुकने से होने वाले खास किस्म के लकवे (स्ट्रोक) में सही मरीज को चुनकर यह इलाज किया जा सकता है। इस इलाज में वक्त की खास अहमियत होती है। अकोला और मूर्तिजापुर में ये सेंटर शुरू होने के बाद संबंधित मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही फौरन इलाज मिल सकेगा।
इस बीच, हर साल 13 अक्टूबर को विश्व थ्रोम्बोसिस दिवस मनाया जाता है। मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि नसों में खून के थक्के बनने का खतरा कम करने के लिए नियमित व्यायाम करना, शरीर का वजन काबू में रखना, पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान से बचना और लंबे वक्त तक एक ही जगह बैठे न रहकर बीच-बीच में चलते-फिरते रहना जरूरी है।