अकोला में अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 के बीच 10,148 ई-वाहनों का रजिस्ट्रेशन
महंगाई और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के बीच अकोला के लोग ई-वाहनों की तरफ मुड़ रहे हैं। उपप्रादेशिक कार्यालय के मुताबिक जिले में 10,148 ई-वाहन रजिस्टर हुए।
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अकोला के लोग अब बड़ी तादाद में ई-वाहन खरीद रहे हैं। बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के चढ़ते दाम और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प की तलाश, ये तीनों वजहें इसके पीछे बताई जा रही हैं।
उपप्रादेशिक कार्यालय की जानकारी के मुताबिक जिले में अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 के बीच कुल 10,148 ई-वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। खासकर पिछले दो सालों में दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों के मौसम में ई-दुपहिया की बिक्री में अच्छा उछाल दिखा है।
ईंधन के बढ़ते दाम, एक चार्जिंग में बढ़िया माइलेज, क्लासिक लुक और क्रेज की वजह से पिछले तीन सालों में लोगों का झुकाव इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ काफी बढ़ा है। नतीजा यह कि इलेक्ट्रिक और हायब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन में खासी बढ़त हुई है। 2023 के मुकाबले 2024 से 2026 के बीच ई-वाहनों की कुल संख्या बढ़ी है। पूरी तरह बैटरी से चलने वाली प्योर ईवी श्रेणी को ग्राहकों ने सबसे ज्यादा पसंद किया है।
पर्यावरण की भाषा में बात करें तो करीब 70 से 80 लाख पेड़ एक साल में जितना कार्बन सोखते हैं, उतने प्रदूषण की बचत इन ई-वाहनों से हो सकती है।
पेट्रोल-डीजल के दाम और पर्यावरण को लेकर जागरूकता के चलते हायब्रिड तकनीक की मांग भी अच्छी खासी है। स्ट्रॉन्ग हायब्रिड और प्लग-इन हायब्रिड, दोनों तरह की गाड़ियों की संख्या एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है। बढ़ते ट्रेंड की वजह से 2026 की शुरुआत में ही आम तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ गई।
इलेक्ट्रिक वाहन का इंजन पारंपरिक वाहनों के इंजन के मुकाबले सरल होता है। आगे चलकर दाम घटने की संभावना को देखते हुए भी ई-वाहनों की मांग बढ़ रही है। हालांकि कुछ दिक्कतें अब भी हैं। चार्जिंग स्टेशन की कमी और तुलनात्मक रूप से ज्यादा कीमत सबसे बड़ी अड़चनें हैं। सरकार और निजी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने की कोशिश में लगी हैं। साथ ही तकनीक में सुधार से इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम घटने की उम्मीद है।
बाजार में इलेक्ट्रिक दुपहिया की कीमतें 50 हजार रुपये से शुरू होती हैं। गाड़ी की क्वालिटी और बैटरी की क्षमता के हिसाब से 1.5 लाख रुपये तक की दुपहिया गाड़ियां उपलब्ध हैं। पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बिजली सस्ती होने से ईंधन की बचत होती है।
भारत सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें सब्सिडी, कम ब्याज दर पर कर्ज और घर के गैराज में चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए अनुदान शामिल है।