अकोला में 42 शिक्षक अतिरिक्त, फिर भी 15 जिला परिषद स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
अकोला जिले में जिला परिषद के 950 स्कूल हैं, 42 शिक्षक अतिरिक्त हैं, फिर भी 15 स्कूल एक ही शिक्षक के सहारे चल रहे हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अकोला जिले की जिला परिषद के स्कूलों में एक अजीब तस्वीर सामने आई है। जिले में 42 शिक्षक अतिरिक्त ठहर रहे हैं, इसके बावजूद 15 स्कूल अब भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इस वजह से इन स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
जिले में जिला परिषद के कुल 950 स्कूल हैं। इनमें से 920 प्राथमिक और 30 माध्यमिक स्कूल हैं। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में बच्चों की संख्या बनाए रखने के लिए प्रशासन की तरफ से कई उपक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी बीच यह नई तस्वीर उभरकर आई है।
पहले जिला परिषद के स्कूलों में शिक्षकों की कमी हमेशा चर्चा का मुद्दा रहती थी। अब हालात बदल गए हैं। विद्यार्थियों की संख्या घटने से कुछ शिक्षक अतिरिक्त हो गए हैं। जिले के 950 स्कूलों में कुल 55 हजार विद्यार्थी दर्ज हैं। मंजूर शिक्षक पदों की संख्या 3 हजार 42 है, जबकि असल में 3 हजार शिक्षक काम कर रहे हैं। यानी फिलहाल 42 शिक्षक अतिरिक्त माने जा रहे हैं।
जिला परिषद के शिक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक पहली से पांचवीं कक्षा वाले स्कूल में 60 विद्यार्थियों के लिए दो शिक्षक मंजूर होते हैं। तीसरा शिक्षक चाहिए तो स्कूल में कम से कम 76 से ऊपर विद्यार्थी होने चाहिए। छठी से आठवीं के लिए 35 तक विद्यार्थी हों तो एक कक्षा के लिए एक पद मंजूर होता है, और दो कक्षाएं हों तो दो पद। ऐसी स्थिति में स्कूल पहली से सातवीं तक का हो, तब भी वहां 4 शिक्षक मंजूर होंगे।
एक अभिभावक का कहना है कि अगर जिला परिषद स्कूल में निजी स्कूलों जैसी पढ़ाई मिले, तो स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ेगी। जिला परिषद में पढ़ा बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं में भी टिकेगा। इसलिए जिला परिषद स्कूल में विषय के हिसाब से शिक्षक होना जरूरी है।
उनके मुताबिक जिला परिषद स्कूल का बच्चा निजी स्कूलों के बच्चों की दौड़ में टिके, इसके लिए उस स्कूल के शिक्षकों को अपनी पढ़ाने की पद्धति में बदलाव करके बच्चों को तैयार करना जरूरी है। जिला परिषद स्कूल में मंजूर कक्षाओं के ही बच्चे पढ़ते हैं। यह बात व्याळा के पालक शीलवंत वानखडे ने कही।