अचानक याददाश्त गई, न कमजोरी न बोलने में दिक्कत; 60 साल के मरीज को थैलेमस में स्ट्रोक निकला
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शीतल गोयल के मुताबिक एमआरआई में थैलेमस के अँटिरिअर न्यूक्लियस वाले हिस्से में खून की सप्लाई रुकी मिली।
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हाल की बातें याद रखने में अचानक दिक्कत होने लगी तो 60 साल के एक शख्स को अस्पताल की ओपीडी में लाया गया। आम तौर पर स्ट्रोक में जो लक्षण दिखते हैं, इस मरीज की हालत उनसे अलग थी। उन्हें शरीर में कमजोरी नहीं थी, बोलने में दिक्कत नहीं थी और कोई दूसरा साफ न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी नहीं था।
अचानक शुरू हुई याददाश्त की इस परेशानी की सही वजह शुरू में पकड़ना मुश्किल रहा। परिवार वालों को पहले लगा कि यह बदलाव तनाव की वजह से हुआ होगा, इसलिए उन्होंने मनोचिकित्सक से सलाह ली। लेकिन याददाश्त का अचानक कम होना गंभीर खतरे का लक्षण होता है, इसलिए आगे की न्यूरोलॉजिकल जांच कराने का फैसला किया गया।
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शीतल गोयल ने बताया कि याददाश्त में अचानक आए बदलाव की वजह ढूंढने के लिए दिमाग का एमआरआई तुरंत कराने की सलाह दी गई थी। इस जांच में थैलेमस के अँटिरिअर न्यूक्लियस वाले एक सीमित हिस्से में खून की सप्लाई रुकी हुई (इन्फार्क्ट) पाई गई। इसी से मरीज की अचानक आई याददाश्त की समस्या का कारण साफ हुआ।
डॉ. गोयल ने कहा, "याददाश्त का अचानक कम होना हमेशा तनाव या मानसिक कारणों से जुड़ा होता है, ऐसा नहीं समझना चाहिए, खासकर तब जब यह बदलाव अचानक हो। इस मामले में शरीर में कमजोरी या बोलने में दिक्कत नहीं थी, इसलिए स्ट्रोक की संभावना आसानी से ध्यान में नहीं आती। लेकिन लक्षणों का अचानक शुरू होना एक अहम खतरे का संकेत था। एमआरआई जांच से थैलेमस के आगे वाले हिस्से में खून की सप्लाई रुकने का पता चला और मरीज की याददाश्त बिगड़ने की वजह साफ हो गई।"
इस मामले से यह बात सामने आती है कि स्ट्रोक में शरीर में कमजोरी आना हमेशा जरूरी नहीं है। दिमाग के किस हिस्से पर असर पड़ा है, उसके हिसाब से स्ट्रोक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। अचानक याददाश्त कम होना, नजर में बदलाव, बर्ताव या शख्सियत में बदलाव, बोलने या भाषा समझने में दिक्कत, चक्कर आना, शरीर का संतुलन बिगड़ना, या अचानक सुन्नपन और संवेदनाओं में बदलाव, ये लक्षण भी स्ट्रोक में दिख सकते हैं।
न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का अचानक शुरू होना एक अहम खतरे का संकेत है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षण आम किस्म के न हों या स्ट्रोक के सामान्य लक्षण न दिखें, फिर भी वक्त पर मेडिकल जांच और दिमाग की सही इमेजिंग हो जाए तो स्ट्रोक का पता चलने में मदद मिल सकती है।
डॉ. गोयल ने आगे कहा, "स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट कीमती होता है। याददाश्त, नजर, बोलचाल, बर्ताव, शरीर के संतुलन या संवेदनाओं में अचानक और बिना किसी साफ वजह के बदलाव हो तो फौरन मेडिकल जांच करा लेना जरूरी है। स्ट्रोक के इन कम जाने-पहचाने लक्षणों को पहचाना जाए तो मरीजों को वक्त पर सही न्यूरोलॉजिकल इलाज मिलने में मदद हो सकती है।"
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