कोलेजन क्रीम और सप्लिमेंट्स कितने असरदार? त्वचा रोग विशेषज्ञ ने बताया क्या है सच
मुंबई के सैफी हॉस्पिटल के डॉ. प्रवीण बनोडकर ने बताया कि कोलेजन क्रीम और सप्लिमेंट्स में कितना मार्केटिंग है और कितना विज्ञान।
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कोलेजन क्रीम और सप्लिमेंट्स आजकल काफी चलन में हैं। बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता है कि ये सच में असर करते हैं या सिर्फ मार्केटिंग का एक ट्रेंड हैं। इसी सवाल पर मुंबई के सैफी हॉस्पिटल के सलाहकार त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण बनोडकर ने जानकारी दी है।
डॉ. बनोडकर के मुताबिक, त्वचा में सबसे ज्यादा मात्रा में पाए जाने वाले प्रोटीन में कोलेजन एक है। यह स्पंज की तरह काम करता है। यह त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करता है, और इसी वजह से त्वचा को मजबूती, कसावट और लचीलापन मिलता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेजन की मात्रा घटती जाती है, और इसीलिए त्वचा पर बारीक लकीरें और झुर्रियां दिखने लगती हैं।
आज बाजार में कोलेजन वाले कई सप्लिमेंट्स और क्रीम मिलते हैं। इनमें कितना असर मार्केटिंग का है और कितनी बातों के पीछे वैज्ञानिक आधार है, यह डॉ. बनोडकर ने समझाया।
क्रीम के बारे में डॉ. बनोडकर ने कहा कि त्वचा पर लगाए जाने वाले कोलेजन की सबसे बड़ी सीमा यह है कि कोलेजन के अणु आकार में बहुत बड़े होते हैं। इस वजह से वे त्वचा के अंदर नहीं जा पाते। यानी त्वचा की सतह पर क्रीम लगाने से उसका कोलेजन अंदर पहुंच जाए, ऐसा जरूरी नहीं। उनके अनुसार कुछ कंपनियों ने नई तकनीक से प्रोडक्ट के तत्वों को त्वचा के अंदर पहुंचाने के तरीके विकसित किए हैं, लेकिन हर प्रोडक्ट में ऐसी तकनीक इस्तेमाल नहीं होती।
इसलिए किसी कोलेजन क्रीम को ओटीसी यानी डॉक्टर की पर्ची के बिना मिलने वाला प्रोडक्ट बताया गया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह असरदार ही होगी। डॉ. बनोडकर के मुताबिक ऐसी क्रीम से मिलने वाले फायदों का मतलब यह न निकाला जाए कि त्वचा की अंदरूनी परत में कोलेजन की सीधी भरपाई हो रही है। कोलेजन बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए रेटिनॉइड्स और विटामिन सी जैसे तत्वों के पीछे ज्यादा ठोस वैज्ञानिक आधार है।
मुंह से लिए जाने वाले कोलेजन सप्लिमेंट्स का स्वरूप उन्होंने अलग बताया। ज्यादातर ऐसे सप्लिमेंट्स में हाइड्रोलाइज्ड कोलेजन या कोलेजन पेप्टाइड्स होते हैं। पाचन के दौरान ये टूटकर छोटे पेप्टाइड्स में बदल जाते हैं।
डॉ. बनोडकर ने यह भी कहा कि कोलेजन सप्लिमेंट्स कोई जादुई गोलियां नहीं हैं। वे बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोक नहीं सकते और उसके असर को पूरी तरह उलट भी नहीं सकते। वे कोशिकाओं की उम्र भी नहीं बढ़ा सकते।
उनके मुताबिक कोलेजन सिर्फ मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला नाम नहीं है। यह पेप्टाइड्स और प्रोटीन से जुड़ा तत्व है, जो त्वचा के लिए काम का हो सकता है। यह त्वचा की मुलायमियत सुधारने में और त्वचा के इलाज के नतीजे बेहतर करने में मदद कर सकता है।
आखिर में डॉ. बनोडकर का कहना है कि प्रोडक्ट पर सिर्फ 'कोलेजन' लिखा होने की वजह से उस पर भरोसा करने के बजाय उसके तत्वों, उनके काम करने के तरीके और उनके पीछे के वैज्ञानिक आधार को समझना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लेने और त्वचा की सही देखभाल पर ध्यान देने की बात कही।
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