शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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गन्ने पर 4 हजार रुपये प्रति टन पहली किस्त दे सोमेश्वर कारखाना, दिलीप खैरे की मांग

गन्ने पर 4 हजार रुपये प्रति टन पहली किस्त दे सोमेश्वर कारखाना, दिलीप खैरे की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

दिलीप खैरे ने श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने से गन्ना उत्पादकों को प्रति टन कम से कम 4 हजार रुपये की पहली किस्त और महीने के हिसाब से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की मांग की है।

बारामती: श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने से गन्ना किसानों को प्रति टन कम से कम चार हजार रुपये की पहली किस्त देने की मांग उठी है। यह मांग दिलीप खैरे ने की है। उनका कहना है कि इस साल गन्ने का उत्पादन घटा है, चीनी कारखानों के बीच होड़ बढ़ रही है और गन्ना उगाने का खर्च भी ऊपर गया है। इन सब बातों को देखते हुए कारखाने को चार हजार रुपये की पहली किस्त का ऐलान करना चाहिए।

खैरे ने यह उम्मीद भी जताई कि दिसंबर से मार्च के बीच जिस गन्ने की पेराई होगी, उसे महीने के हिसाब से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिले।

उन्होंने बताया कि पश्चिम महाराष्ट्र के कई कारखाने प्रति टन 3500 से 3800 रुपये के आसपास पहली किस्त देने की तैयारी में हैं। सोमेश्वर कारखाने की पिछले सीजन की चीनी रिकवरी 12.27 प्रतिशत रही थी। खैरे के मुताबिक पेराई का प्रदर्शन और कारखाने की आर्थिक ताकत देखते हुए किसानों को चार हजार रुपये की पहली किस्त देने पर सकारात्मक फैसला लेना जरूरी है।

प्रोत्साहन राशि को लेकर उनका सुझाव है कि सीजन की शुरुआत से ही यह योजना चलाई जाए, ताकि कारखाने का पेराई सीजन ज्यादा दिन चले और गन्ना दूसरे कारखानों में जाना कम हो। इसके तहत दिसंबर में पेरे जाने वाले गन्ने पर प्रति टन 100 रुपये, जनवरी में 200 रुपये, फरवरी में 300 रुपये और मार्च में 400 रुपये अतिरिक्त दिए जाएं। यह रकम प्रस्तावित चार हजार रुपये की पहली किस्त के ऊपर से हो, ऐसी उनकी मांग है।

खैरे ने साफ किया कि अगर सीजन की शुरुआत से ही प्रोत्साहन मिलेगा, तो किसान अपना गन्ना सोमेश्वर कारखाने को देना पसंद करेंगे। इससे गन्ने की आवक बनी रहेगी और पेराई की योजना ज्यादा अच्छे से बन सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इस साल गन्ना कम होने के बावजूद 13 से 14 लाख टन से ज्यादा पेराई का लक्ष्य पाने के लिए सही दाम, समय पर कटाई और ढुलाई का इंतजाम जरूरी है। उन्होंने अपील की कि कारखाना कम से कम 150 दिन या उससे भी ज्यादा चले, इस हिसाब से योजना बनाई जाए।

इसके अलावा खैरे ने मांग की कि माळेगाव, छत्रपती और सोमेश्वर, इन तीनों कारखानों की पेराई के आंकड़े, चीनी रिकवरी, कर्ज का बोझ और आर्थिक हालत की तुलना सदस्यों के सामने रखी जाए। इसके लिए श्वेतपत्र जारी किया जाए।

उनके मुताबिक तीनों कारखाने एक ही नेतृत्व में हैं, फिर भी हर एक की आर्थिक स्थिति अलग है। इसलिए दूसरे कारखानों की भलाई के लिए सोमेश्वर के किसानों का नुकसान नहीं होना चाहिए। सोमेश्वर का गन्ना दूसरे कारखानों की तरफ न मुड़े, इसके लिए किसानों को वाजिब दाम, पारदर्शी वजन, समय पर गन्ने का बिल और कटाई की गारंटी दी जाए। खैरे ने मांग की है कि संचालक मंडल किसानों के हित को पहले रखते हुए चार हजार रुपये की पहली किस्त और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का ऐलान करे।

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