बारामती और इंदापुर में सोमवार तड़के से मूसलाधार बारिश, अंगूर और अनार के बागों पर खतरा
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बारामती शहर में सुबह सात बजे तक 158 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। पानी की किल्लत झेल रहे किसानों को राहत मिली, पर फलों के बागों के नुकसान का डर है।
पुणे जिले के बारामती और इंदापुर इलाके में सोमवार तड़के से तेज बारिश हुई। बारामती शहर, बारानी इलाके और इंदापुर तालुका के ज्यादातर हिस्सों में सुबह से ही मूसलाधार पानी गिरता रहा।
बारामती शहर में सुबह सात बजे तक 158 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। सुबह सवा दस बजे तक बारिश का जोर बना रहा, इसलिए माना जा रहा है कि कुल बारिश 170 मिलीमीटर के पार निकल गई होगी। यह आंकड़ा अभी अनुमान के तौर पर ही बताया जा रहा है।
शहर में बारिश तड़के साढ़े चार बजे के आसपास शुरू हुई। शुरू से ही जोर इतना ज्यादा था कि कई सड़कों पर पानी भर गया। निचले इलाकों से पानी बहने लगा और कुछ जगह आम जनजीवन पर असर पड़ा। बारामती के लोगों ने कई दिनों बाद बादल फटने जैसी बारिश देखी।
सिर्फ शहर ही नहीं, मालेगांव, काटेवाडी, पिंपली-लिमटेक और सोनगाव में भी अच्छी बारिश हुई। बारानी इलाके के मोरगाव और जलगाव क.प. में, और इंदापुर तालुका के भवानीनगर, सणसर, लासुर्णे और आसपास के गांवों में भी पानी जमकर बरसा।
पिछले कई दिनों से बारिश गायब थी, इसलिए बारामती परिसर में पानी की किल्लत गहराती जा रही थी। बारानी इलाके के हालात गंभीर हो गए थे, जबकि सिंचित इलाके में भी पानी की दिक्कत महसूस होने लगी थी। कई जगह कुओं और बोरवेल का जलस्तर नीचे चला गया था। किसान लौटती बारिश की आस में आसमान की तरफ देख रहे थे, पर हस्त नक्षत्र के दौरान भी उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई, जिससे उनकी फिक्र बढ़ गई थी।
कुछ दिन पहले नीरा बायीं नहर से पानी छोड़ना बंद हो गया था। इससे किल्लत और गंभीर होने की आशंका खड़ी हो गई थी। ऐसे में सोमवार तड़के से हुई तेज बारिश ने खेती के साथ पीने के पानी के सवाल पर भी उम्मीद जगाई है।
बारामती और इंदापुर तालुका के गन्ना उत्पादकों और चारा फसल लेने वाले किसानों को इस बारिश से बड़ी राहत मिली है। पानी के बिना मुश्किल में आई फसलों को इसका फायदा होने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ अंगूर और अनार के बागों को इस मूसलाधार बारिश से नुकसान पहुंचने की आशंका है, इसलिए फल उगाने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसलों को कितना नुकसान होगा, यह बारिश के जोर और उसके बाद के मौसम पर निर्भर करेगा। एक तरफ पानी की कमी से जूझ रही खेती को नई जान मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ फलों के बागों के नुकसान का डर बना हुआ है।
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