मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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किणी टोल नाके पर गन्ना किसानों का चक्का जाम, पहली किस्त 4,500 रुपये प्रति टन मांगी

किणी टोल नाके पर गन्ना किसानों का चक्का जाम, पहली किस्त 4,500 रुपये प्रति टन मांगी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

राजू शेट्टी की अगुवाई में गन्ना किसानों ने पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर किणी टोल प्लाज़ा के पास ट्रैफिक रोक दिया।

पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर मंगलवार को सफर करने वालों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। गन्ना उगाने वाले किसानों ने किणी टोल प्लाज़ा के पास रास्ता रोक दिया और ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। किसान चीनी कारखानों से गन्ने की पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये प्रति टन की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन की अगुवाई स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के संस्थापक अध्यक्ष राजू शेट्टी कर रहे हैं। किसानों ने सड़क पर उतरने का फैसला तब लिया, जब भुगतान के इस झगड़े को बातचीत से सुलझाने की कोशिशें नाकाम रहीं। प्रशासन के प्रतिनिधियों और चीनी मिल मालिकों ने संगठन के साथ अब तक दो दौर की बातचीत की, लेकिन किसी भी बैठक में सहमति नहीं बन पाई।

इससे पहले संगठन कई दिनों से जिले भर में चीनी कारखानों के बाहर धरना और प्रदर्शन करता आ रहा था। जब उससे भी बात नहीं बनी, तो हाईवे पर उतरने का रास्ता चुना गया।

राजू शेट्टी करीब सुबह 11.30 बजे आंदोलन में पहुंचे। वे पहले किणी के श्री मारुति मंदिर गए थे और वहां दर्शन के बाद मौके पर आए। उनके आते ही किसानों ने हाईवे पर कब्जा कर लिया और गाड़ियां रोक दीं। इससे प्रशासन और मिल प्रबंधनों पर अपनी मांग पर ध्यान देने का दबाव और बढ़ गया।

हाईवे जाम को देखते हुए किणी टोल प्लाज़ा के आसपास भारी पुलिस बंदोबस्त लगाया गया। हालात संभालने और कानून-व्यवस्था की कोई दिक्कत न होने देने के लिए 300 से ज़्यादा पुलिसवालों को तैनात किया गया।

प्रशासन ने प्रभावित हिस्से के दोनों तरफ ट्रैफिक मोड़ा। कोल्हापुर की ओर जाने वाली गाड़ियों को जंक्शन से होकर निकलने वाले रास्ते पर भेजा गया, जबकि पुणे की तरफ से आने वाली गाड़ियों को वाघवाडी फाटा से डायवर्ट किया गया। फिर भी इन इंतज़ामों से भीड़ कम नहीं हुई। टोल प्लाज़ा के पास गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई और भारी जाम लग गया।

किसानों ने साफ कह दिया है कि जब तक गन्ना उत्पादकों को 4,500 रुपये प्रति टन की पहली किस्त का भरोसा नहीं मिलता, तब तक रास्ता रोको आंदोलन चलता रहेगा। कोई समझौता हुए बिना संगठन आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं है।

बातचीत से अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। इस बीच एक अहम हाईवे का रास्ता बंद है और प्रशासन तथा चीनी मिल मालिकों पर भुगतान का मसला जल्द सुलझाने का दबाव है।

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