मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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स्वाभिमानी शेतकरी संघटना 3 नवंबर को पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर दो जगह करेगी चक्का जाम

स्वाभिमानी शेतकरी संघटना 3 नवंबर को पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर दो जगह करेगी चक्का जाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

गन्ने की पहली किस्त 4500 रुपये प्रति टन करने और नदियों का पानी देने की मांग को लेकर कोल्हापुर-सांगली के किसान किणी टोलनाका पर और सातारा के किसान नागठाणे में बैठेंगे।

टिटवेवाडी: गन्ना उगाने वाले किसानों की मेहनत का सही दाम मिले, इस सीजन की पहली किस्त 4500 रुपये प्रतिटन घोषित की जाए और किसानों के हक का पानी उन्हें मिले, इन मांगों को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने आर-पार की लड़ाई का रुख अपना लिया है। मंगलवार, 3 नवंबर को पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय महामार्ग पर एक ही दिन दो जगह अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।

संगठन के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी की अगुवाई में कोल्हापुर और सांगली जिलों के किसान किणी टोलनाका पर आंदोलन करेंगे। उसी समय सातारा जिले में संगठन के सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और गन्ना उत्पादक किसान नागठाणे (तहसील सातारा) में उरमोडी नदी के पुल के पास हाईवे पर चक्का जाम करेंगे। इससे गन्ना दर के सवाल पर पूरे पश्चिम महाराष्ट्र में आंदोलन की आंच और तेज होगी।

संगठन के मुताबिक, पिछले कई दिनों से कारखानेदारों को बातचीत से रास्ता निकालने का मौका दिया गया। लेकिन किसानों की उत्पादन लागत को देखते हुए 4500 रुपये प्रतिटन की पहली किस्त घोषित करने पर जैसी सकारात्मक भूमिका की उम्मीद थी, वैसी नहीं दिखी। इसी वजह से किसानों में भारी नाराजगी है। सातारा जिले के खटाव, कराड और कोरेगाव तहसीलों में कई जगह चीनी मिलों की तरफ जा रही गन्ने की ढुलाई रोकी जा चुकी है। पिछले दो दिनों से किसान और संगठन के कार्यकर्ता सड़क पर ही डेरा डालकर आंदोलन संभाल रहे हैं। अब अगले कदम के तौर पर नागठाणे में अनिश्चितकालीन चक्का जाम का ऐलान किया गया है।

आंदोलन में सिर्फ गन्ना दर ही नहीं, कृष्णा, उरमोडी और तारली नदियों के पानी का मुद्दा भी जोर से उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि बांधों में पानी का भंडार है, फिर भी जब किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने की बात आती है तो नियम, कायदे और नहर सलाहकार समिति की बैठकों का हवाला दिया जाता है। संगठन ने गंभीर आरोप लगाया है कि किसानों के हक का पानी कहीं और मोड़ा जा रहा है।

संगठन का सवाल है कि पानी दूसरी तरफ ले जाते समय नियम आड़े नहीं आते, तो वही पानी किसानों को देते समय कानून की दुहाई क्यों दी जाती है। संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अधिकार और सत्ता का गलत इस्तेमाल करके नकली पानी की किल्लत पैदा करना, किसानों को पानी का डर दिखाना और उनका गन्ना कम दाम पर कारखानों की ओर मोड़ना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृष्णा, उरमोडी और तारली नदी से किसानों के हक का पानी छोड़ने की मांग भी नागठाणे के आंदोलन में रखी जाएगी।

अपील में कहा गया है कि गन्ना उगाने वाला किसान टिकेगा, तभी गांव का बाजार, व्यापारी, दुकानदार, ट्रांसपोर्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था टिकेगी। इसलिए सातारा जिले के सभी किसानों, व्यापारियों, दुकानदारों, नौजवानों और आम नागरिकों से 3 नवंबर को नागठाणे के आंदोलन में एक दिन किसानों के जायज हक के लिए शामिल होने को कहा गया है।

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने दृढ़ निश्चय जताया है कि जब तक किसानों की मेहनत की कीमत और पानी का हक नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। कोल्हापुर-सांगली के किसान किणी टोलनाका पर और सातारा के किसान नागठाणे में एक साथ सड़क पर उतरकर अपनी एकजुटता दिखाएंगे।

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