पुणे में जून 2027 तक सिर्फ 7.15 TMC पानी, दिवाली बाद एक दिन छोड़कर सप्लाई के आसार
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पुणे महानगरपालिका के हिस्से का पानी तेजी से घट रहा है। दिवाली के बाद शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई करनी पड़ सकती है।
पुणे, 31 अक्टूबर 2026: जून 2027 तक शहर की जरूरत पूरी करने के लिए सिर्फ 7.15 TMC पानी बचा है। घटते स्टॉक और बढ़ती मांग के बीच प्रशासन के सामने इसे संभालने की चुनौती है। दिवाली के बाद पुणे में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई होने की संभावना है।
पुणे महानगरपालिका (PMC) को कुल 13.5 TMC पानी मिला है। इसमें से करीब 6.35 TMC पानी 1 जुलाई से अब तक इस्तेमाल हो चुका है। बचे हुए पानी को गर्मियों तक चलाना होगा, और बारिश को लेकर अनिश्चितता से मुश्किल और बढ़ गई है।
यह मुद्दा गुरुवार को हुई कैनाल कमेटी की बैठक में उठा। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री और पुणे की पालक मंत्री सुनेत्रा पवार ने की। जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे भी वहां मौजूद थे।
PMC की अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर ने कहा कि शहर की असल जरूरत और उपलब्ध स्टॉक के बीच फर्क है, इसलिए कटौती करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि निगम को एक दिन छोड़कर सप्लाई लागू करनी पड़ सकती है। अंतिम फैसले से पहले प्रस्तावित कटौती पर मेयर और सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी इशारा किया कि पानी की कमी के चलते निगम को कुछ कैपिटल वर्क्स की समीक्षा करनी पड़ सकती है या उन्हें घटाना पड़ सकता है।
पानी के आवंटन को लेकर यह भी उलझन है कि वह किस अवधि के लिए है। पुणे के लिए 13 TMC तय किया गया है, लेकिन साफ नहीं है कि यह कोटा 1 नवंबर 2026 से लागू होता है, या 1 जुलाई 2026 से 31 अगस्त 2027 तक के लिए है। अधिकारियों के मुताबिक 1 जुलाई से अब तक 6.35 TMC पानी इस्तेमाल हो चुका है।
इस्तेमाल लायक स्टॉक और कम हो जाता है, क्योंकि मौजूद पानी का 10 फीसदी हिस्सा आपातकालीन जरूरतों के लिए बफर के तौर पर अलग रखा गया है।
विपक्षी नेताओं ने इस आवंटन की आलोचना की। उनका आरोप है कि पुणे के हिस्से में पर्याप्त पानी नहीं आया और बैठक में शहर के किसी विधायक ने आपत्ति नहीं जताई। उनका दावा है कि निगम से जून 2027 तक सिर्फ 7.15 TMC में काम चलाने को कहा गया है, इसलिए दिवाली के बाद एक दिन छोड़कर सप्लाई की नौबत आ सकती है।
अब PMC को पूरे शहर में बराबरी से पानी पहुंचाने के लिए बंटवारे की योजना तैयार करनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक बचे हुए पानी को संभालने में खपत घटाना, लीकेज रोकना और लोगों का सहयोग लेना अहम रहेगा।
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