पुणे में पानी की बर्बादी पर सख्ती, तीसरी बार नियम तोड़ा तो दर्ज होगा केस
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पुणे नगर निगम ने पानी कटौती के दौरान पीने के पानी के गलत इस्तेमाल पर जुर्माने और तीसरी बार उल्लंघन पर गुनाह दर्ज करने का नियम लागू किया है।
पुणे में पीने के पानी की बर्बादी करने वालों पर अब पुणे नगर निगम जुर्माना लगाएगा। पानी कटौती के दौरान वॉशिंग सेंटर बंद रखने होंगे। इसके अलावा स्विमिंग पूल, निजी बगीचों, निर्माण और सड़कों के कामों में पीने का पानी इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। स्थायी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने बताया कि इन नियमों को दो बार तोड़ने पर जुर्माना लगेगा और तीसरी बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ गुनाह दर्ज किया जाएगा।
शहर में जितना पानी उपलब्ध है, उसका बारीकी से हिसाब रखने और उसकी बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम ने खास कदम उठाए हैं। अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त पवनीत कौर ने इस बारे में आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। आदेश पर अमल की जिम्मेदारी जलापूर्ति विभाग के साथ क्षेत्रीय कार्यालयों, उद्यान, निर्माण विकास, भवन रचना और पथ विभाग को सौंपी गई है।
पानी कटौती की अवधि में सरकारी और निजी, दोनों तरह के वाहन धुलाई केंद्र यानी वॉशिंग सेंटर बंद रखने होंगे। कोई केंद्र चालू मिला तो दस हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। हां, जो केंद्र अपनी निजी बोरवेल या कुएं का पानी इस्तेमाल करते हैं, उन्हें हफ्ते में तीन दिन, यानी रविवार, मंगलवार और गुरुवार को चालू रखने की छूट दी गई है। निजी और सार्वजनिक स्विमिंग पूल तथा निजी बगीचों में पीने का पानी डालना मना है। नियम तोड़ने पर यहां भी दस हजार रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।
शहर में इमारतों के निर्माण, सड़कों के काम और रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट के लिए नगर निगम का पीने का पानी नहीं मिलेगा। इन कामों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का साफ किया हुआ पानी या बोरवेल और कुओं का पानी लगाना होगा। जो ठेकेदार यह नियम तोड़ेंगे, उन पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगेगा और उस काम को रोकने की कार्रवाई भी होगी।
अनधिकृत नल कनेक्शन मिलने पर उसे फौरन बंद कर दिया जाएगा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। दोबारा अनधिकृत कनेक्शन लेने पर कानूनी कार्रवाई होगी। पानी की टंकियां भर कर बहती मिलीं तो एक हजार रुपये, और टैंकर से पानी रिसता मिला तो दस हजार रुपये जुर्माना लगेगा। पानी सप्लाई की लाइनों में जहां भी लीकेज है, उसे तुरंत ठीक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निजी हाउसिंग सोसायटियों में जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़े हैं, उन्हें चालू करने के लिए नोटिस भेजे जाएंगे। साफ किए गए पानी को बगीचों और टॉयलेट के फ्लश में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाएगी। टंकियां भरकर बहें नहीं, इसके लिए ऑटोमैटिक फ्लोट वाल्व लगाने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
आदेश पर अमल के लिए हर विभाग को एक नोडल अधिकारी तय करना होगा। की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हर महीने की 15 तारीख तक जलापूर्ति विभाग को देनी होगी। अमल में लापरवाही करने वाले नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासन भंग की कार्रवाई भी की जाएगी।
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