पुणे में पानी कटौती 10 फीसदी से ऊपर नहीं जाएगी, महापौर ने प्रशासन को दिया निर्देश
नहर समिति की बैठक तक शहर में मौजूदा 10 फीसदी कटौती नहीं बढ़ेगी, वहीं स्थायी समिति के पार्षद ने साल भर के जल प्रबंधन के खाके की मांग की है।
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पुणे के लोगों पर पानी कटौती बढ़ने का जो खतरा मंडरा रहा था, वह फिलहाल टल गया है। महापौर ने प्रशासन को साफ निर्देश दिए हैं कि नहर समिति की बैठक होने तक शहर में चल रही 10 फीसदी पानी कटौती को और न बढ़ाया जाए।
महापौर ने सिंचाई विभाग की तरफ से पुणे महानगरपालिका को मंजूर किए गए पानी के कोटे पर नाराजगी जताई है। महानगरपालिका का कहना है कि शहर की जरूरत देखते हुए पिछले साल की तरह कम से कम 16 टीएमसी पानी मिलना चाहिए। इस हिसाब से मंजूर कोटे में करीब पांच टीएमसी की कमी साफ दिखती है। उधर बांधों में इस वक्त करीब 24 टीएमसी पानी जमा है। इसके बावजूद पुणे के लिए कम कोटा मंजूर हुआ है, इसलिए पानी कटौती को लेकर लोगों में उलझन बनी हुई है।
इसी बीच स्थायी समिति के पार्षद हरिदास कृष्णा चरवड ने एक प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की है कि पुणे शहर, उपनगरों और नए जोड़े गए गांवों के लिए साल भर के पानी का नियोजन किया जाए और इसके लिए समग्र जल प्रबंधन योजना बनाई जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि शहर की बढ़ती आबादी, तेजी से फैलते शहरीकरण और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए महानगरपालिका के सामने पानी के नियोजन की चुनौती बढ़ती जा रही है। मकसद यह है कि आगे पानी की किल्लत से बचा जा सके और पुणे वालों को पूरे साल नियमित पानी मिलता रहे।
प्रस्ताव में माना गया है कि अभी शहर में पानी की कोई गंभीर कमी नहीं है। फिर भी आगे आने वाले संकट से निपटने के लिए उपाय अभी से करना जरूरी बताया गया है। इसमें मौजूद पानी का ठीक से नियोजन, पानी की लाइनों में होने वाली लीकेज रोकना, पानी की बर्बादी से बचना और प्रक्रिया किए हुए सीवेज के पानी का दोबारा इस्तेमाल करना शामिल है।
कटौती के तरीके को लेकर भी एक मांग रखी गई है। हफ्ते में एक दिन पानी बंद रखने या एक दिन छोड़कर पानी देने जैसे विकल्पों की जगह रोज थोड़ी देर नियमित सप्लाई दी जा सकती है या नहीं, इसका तकनीकी और व्यावहारिक अध्ययन किया जाए।
साल भर का नियोजन करते समय सिंचाई विभाग से मंजूर पानी का कोटा, बांधों में उपलब्ध जल भंडार, बढ़ती आबादी और पानी बांटने के दौरान होने वाली लीकेज, इन सबका जायजा लेने को कहा गया है। साथ ही शहर, उपनगरों और जोड़े गए गांवों में आबादी, भौगोलिक हालात और वितरण की क्षमता के हिसाब से पारदर्शी मानदंड तय करके पानी का समान बंटवारा करने की मांग भी की गई है।
प्रस्ताव में नागरिकों की भागीदारी पर भी जोर है। 'पानी बचाओ, पुणे बचाओ' अभियान चलाकर लोगों को घर में पानी बचाने, नल की लीकेज रोकने और पानी की बर्बादी से बचने के बारे में जागरूक करने की मांग की गई है। इन उपायों को ठीक से लागू करने के लिए महानगरपालिका के जलापूर्ति, सीवेज प्रक्रिया, उद्यान और निर्माण विभाग के साथ सिंचाई विभाग के बीच तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया है।
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