शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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PMC ने स्कूलों में CCTV कैमरों और कात्रज-कोंढवा रोड पर अंडरग्राउंड केबल के लिए 4.6 करोड़ रुपये मंजूर किए

PMC ने स्कूलों में CCTV कैमरों और कात्रज-कोंढवा रोड पर अंडरग्राउंड केबल के लिए 4.6 करोड़ रुपये मंजूर किए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

पुणे महानगरपालिका ने दो प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। स्कूलों के कैमरों का काम आठ महीने में और बिजली की तारों का काम नौ महीने में पूरा होना है।

पुणे: पुणे महानगरपालिका (PMC) ने दो प्रोजेक्ट के लिए करीब 4.6 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। एक प्रोजेक्ट महानगरपालिका के स्कूलों में CCTV कैमरों का दायरा बढ़ाने का है, तो दूसरा कात्रज-कोंढवा रोड पर ऊपर से गुजरने वाली बिजली की तारों को जमीन के नीचे ले जाने का। दोनों प्रोजेक्ट की रकम जोड़ें तो यही करीब 4.6 करोड़ रुपये बैठती है।

स्कूलों में और कैमरे लगाने के लिए करीब 2 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। ये कैमरे महानगरपालिका के अपने स्कूलों में लगेंगे। यानी महानगरपालिका के स्कूलों में कैमरों का दायरा बढ़ाया जाएगा, और इसके लिए अलग से रकम तय कर दी गई है। यह काम आठ महीने के अंदर पूरा होने की उम्मीद है।

दूसरे प्रोजेक्ट पर करीब 2.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें कात्रज-कोंढवा रोड पर बिजली की ऊपरी लाइनें अंडरग्राउंड की जाएंगी। यह हिस्सा अभय अरण्य सोसाइटी से शिवशंभो नगर लेन नंबर 1 तक का है। इस काम के लिए महानगरपालिका ने नौ महीने की डेडलाइन तय की है।

स्कूलों वाले प्रोजेक्ट का मकसद बच्चों की सुरक्षा बेहतर करना है। स्कूल परिसर में कैमरों का नेटवर्क हो तो यह देखना आसान हो जाता है कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है। कुछ गड़बड़ हो जाए तो फौरन कदम भी उठाया जा सकता है।

केबल वाला काम सड़क के इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुधारने की कोशिश का हिस्सा है। भीड़भाड़ वाली सड़कों के किनारे लटकती तारें जगह घेरती हैं। बारिश या तेज हवा में इनसे खतरा भी रहता है। तारें जमीन के नीचे चली जाएं तो सड़कें साफ और ज्यादा सुरक्षित हो सकती हैं।

मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकते हैं। जमीन पर काम शुरू होने से पहले महानगरपालिका से आम प्रक्रिया अपनाने की उम्मीद है, यानी बोली मंगाना और ठेकेदार तय करना। यह मंजूरी पहला कदम है, असली काम ठेकेदार तय होने के बाद ही जमीन पर दिखेगा।

पुणे में शहर के काम अक्सर डेडलाइन से आगे खिंचते रहे हैं। इसी वजह से आठ और नौ महीने की इन समयसीमाओं पर नजर रहेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या PMC दोनों प्रोजेक्ट वक्त पर पूरे कर पाएगी।

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