शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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लंदन से MBA करने गई मुग्धा देशमुख गहुंजे के बंद फ्लैट में मृत मिलीं, दो महीने पहले छोड़ चुकी थीं लंदन

लंदन से MBA करने गई मुग्धा देशमुख गहुंजे के बंद फ्लैट में मृत मिलीं, दो महीने पहले छोड़ चुकी थीं लंदन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

छत्रपति संभाजीनगर की 34 साल की मुग्धा देशमुख का सड़ा हुआ शव 28 अक्टूबर की रात गहूंजे की लोढा सोसायटी के फ्लैट में मिला। माता-पिता को पता ही नहीं था कि वह भारत लौट चुकी है।

पिंपरी-चिंचवड और पुणे से सटे गहुंजे में एक बंद फ्लैट के अंदर से 34 साल की एक महिला की सड़ी-गली लाश मिली है। इससे पूरे इलाके में हड़कंप है। मरने वाली का नाम मुग्धा अविनाश देशमुख है। वे छत्रपति संभाजीनगर की रहने वाली थीं और पढ़ाई के लिए लंदन गई थीं। लाश गहुंजे की आलीशान लोढा बेलमोंडो सोसायटी के एक फ्लैट में मिली। पुलिस के मुताबिक यह 28 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे की बात है।

मुग्धा के पिता अविनाश देशमुख सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं और छत्रपति संभाजीनगर में ही रहते हैं। उनके पद को लेकर दोनों जगह अलग-अलग बात लिखी गई है। एक रिपोर्ट में उन्हें छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम का रिटायर्ड मुख्य इंजीनियर बताया गया है, तो दूसरी में शहर अभियंता के पद से रिटायर। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है और मुग्धा सबसे बड़ी थीं। उन्होंने पुणे के COEP कॉलेज से डिग्री ली और एक बैंक में नौकरी की। MBA करना उनका पुराना सपना था। नौकरी से पैसे जोड़कर वे जुलाई 2025 में लंदन चली गईं। घरवालों को उन्होंने बताया था कि आगे का खर्च निकालने के लिए वहां पार्ट टाइम काम करेंगी। लंदन में रहते हुए वे हर रात फोन या वीडियो कॉल पर मां-बाप और घर के बाकी लोगों से बात करती थीं।

23 अक्टूबर की रात भी उनकी मां से बात हुई। मुग्धा ने कहा कि उन्हें जॉब इंटरव्यू देना है और जल्दी में हैं, इसलिए फोन रख रही हैं। मां से यही उनकी आखिरी बातचीत साबित हुई। अगले दिन उन्होंने मां, पिता, भाई, बहन, रिश्तेदार और दोस्त, किसी का भी फोन नहीं उठाया और कुछ देर बाद फोन बंद हो गया।

परेशान माता-पिता ने लंदन में रहने वाली मुग्धा की एक सहेली से संपर्क किया। सहेली ने बताया कि उसकी भी 22 अक्टूबर के बाद मुग्धा से बात नहीं हुई। घरवालों ने उसी से लंदन पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत करवाई। 26 अक्टूबर को लंदन पुलिस ने सहेली को बताया कि मुग्धा तो अगस्त के आखिर में ही लंदन छोड़ चुकी हैं। भारत लौटने की खबर उन्होंने घर में किसी को नहीं दी थी। माता-पिता ने लंदन के भारतीय उच्चायोग में भी शिकायत की, पर वहां से कोई जवाब नहीं आया।

इसके बाद माता-पिता ने मुग्धा के बैंक से उनके खाते की जानकारी निकलवाई। पता चला कि वे भारत में हैं और अलग-अलग ऑनलाइन साइट्स से खाना मंगवा रही थीं। 27 अक्टूबर को माता-पिता छत्रपति संभाजीनगर में पुलिस के पास पहुंचे। उस्मानपुरा पुलिस स्टेशन में बेटी के अपहरण का मामला दर्ज हुआ और उन्होंने पूरा घटनाक्रम और बैंक की जानकारी पुलिस को सौंप दी। पुलिस ने भी बैंक खातों के लेनदेन और डिजिटल निशान खंगाले। उसमें दिखा कि ज़ोमैटो, ब्लिंकिट और स्विगी जैसे फूड ऐप पर भारत में उनका क्रेडिट कार्ड चल रहा था। इससे पक्का हो गया कि वे लंदन में नहीं, भारत में हैं।

तकनीकी जांच से लोकेशन निकली तो साफ हुआ कि मुग्धा गहुंजे की लोढा सोसायटी में हैं। छत्रपति संभाजीनगर की पुलिस माता-पिता को साथ लेकर पुणे पहुंची और पिंपरी-चिंचवड पुलिस आयुक्तालय के शिरगांव पुलिस को खबर दी। रात करीब 11 बजे पुलिस माता-पिता के साथ सोसायटी पहुंची। फ्लैट अंदर से बंद था, इसलिए चाबी बनाने वाले को बुलाया गया और नकली चाबी से दरवाजा खोला गया। दरवाजा खुलते ही बदबू का भभका आया। अंदर बेडरूम में बिस्तर पर मुग्धा करवट लिए पड़ी थीं और लाश सड़ चुकी थी।

शिरगांव पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर देवेंद्र चव्हाण ने बताया कि मामले की हर पहलू से गहराई से जांच चल रही है। उनके मुताबिक मुग्धा अगस्त 2026 से इसी फ्लैट में अकेली रह रही थीं। उन्होंने 21 अक्टूबर को घर में काम करने वाली बाई को भी काम पर आने से मना कर दिया था। दूसरी तरफ, पुलिस सूत्रों के हिसाब से मुग्धा ने यह फ्लैट अप्रैल 2026 में किराए पर लिया था और मकान मालिक से एग्रीमेंट भी मिल गया है। यानी वे यहां कब से रह रही थीं, इस पर दोनों बातें अलग हैं।

सिक्योरिटी गार्ड और पड़ोसियों से पूछताछ में यह पता नहीं चला कि कोई उनसे मिलने आता था। फोन हिस्ट्री में भी वे ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं दिखीं। घर की तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पोस्टमार्टम हो चुका है और रिपोर्ट में शरीर पर कोई चोट नहीं दिखी, फिर भी एहतियात के तौर पर विसरा सुरक्षित रखा गया है। शुरुआती अंदाजा है कि मौत अटैक से हुई हो सकती है, लेकिन पुलिस का कहना है कि असली वजह मेडिकल रिपोर्ट आने और मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के बाद ही साफ होगी।

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