मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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पुणे एसीबी का कृषि उप निदेशक किरण जाधव पर शिकंजा, 4.37 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति, नौ ठिकानों पर तलाशी

पुणे एसीबी का कृषि उप निदेशक किरण जाधव पर शिकंजा, 4.37 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति, नौ ठिकानों पर तलाशी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

एसीबी ने कृषि उपसंचालक किरण जाधव और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर पुणे, नवी मुंबई और सतारा में नौ ठिकानों पर तलाशी ली।

पुणे में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कृषि विभाग के उप निदेशक किरण जाधव और उनकी पत्नी संगीता जाधव पर आय से ज्यादा संपत्ति जमा करने का केस दर्ज किया है। केस दर्ज होने के बाद टीमों ने दंपती से जुड़े नौ ठिकानों पर तलाशी शुरू कर दी। बताया गया है कि तलाशी अभी चल रही है। अफसर का नाम एक जगह किरण श्यामराव जाधव और दूसरी जगह किरण शामराव जाधव लिखा मिला है।

एसीबी की अलग-अलग टीमें सोमवार सुबह से पुणे, नवी मुंबई और सतारा जिले की संपत्तियों पर पहुंची हुई हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि जाधव और उनके रिश्तेदारों के नाम पर 15 जगहों पर खेती की जमीन है। इसके अलावा पुणे में पांच फ्लैट, नवी मुंबई में एक फ्लैट और सतारा जिले के दहिवडी में तीन संपत्तियां भी एसीबी की नजर में आई हैं।

एसीबी के मुताबिक दंपती ने अपनी जानी-पहचानी कमाई से करीब 128 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति खड़ी की। इस रकम का हिसाब 4,37,74,930 रुपये बैठता है, यानी 4.37 करोड़ से ऊपर। मामला पुणे के बंड गार्डन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है।

आंकड़ों की बात करें तो जांच की तय अवधि में दंपती की कुल कमाई 3.40 करोड़ रुपये निकली और खर्च 3.55 करोड़ रुपये रहा। एसीबी ने 4.22 करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान की। इन्हीं तीनों आंकड़ों को जोड़कर एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची कि 4.37 करोड़ रुपये की संपत्ति का कोई हिसाब नहीं मिलता। एसीबी ने यह पड़ताल 4 जून 1994 से 2 दिसंबर 2025 तक, यानी 31 साल से ज्यादा के दौर की है।

इस केस की शुरुआत खुली जांच से हुई थी। अप्रैल 2025 में भाजपा विधायक सुरेश धस ने कृषि विभाग में गड़बड़ी और पैसों की अनियमितता के आरोप लगाए थे, जिसके बाद विभाग के कामकाज और लाइसेंस से जुड़े कुछ लेनदेन पर सवाल उठे। इसे देखते हुए एसीबी के महानिदेशक ने 2 दिसंबर 2025 को जाधव की संपत्ति और पैसों के लेनदेन की खुली जांच का आदेश दिया। इसके बाद एजेंसी ने दंपती की आमदनी, खर्च, निवेश और संपत्ति खंगाली और फिर अपराध दर्ज किया।

शिकायत बंड गार्डन पुलिस स्टेशन में अपर पुलिस अधीक्षक अजित पाटील ने दी। आगे की जांच अपर पुलिस अधीक्षक अर्जुन भोसले के पास है और यह पूरी जांच पुलिस अधीक्षक शिरीष सरदेशपांडे की देखरेख में होगी। सरदेशपांडे ने बताया कि केस दर्ज होते ही सभी नौ ठिकानों पर तलाशी शुरू की गई। टीमें संपत्तियों और उनसे जुड़े कागजात देख रही हैं। एसीबी की जांच में संगीता जाधव की संपत्ति के दस्तावेज भी शामिल हैं। एजेंसी को शक है कि यह दौलत गलत तरीके से जमा की गई, और पत्नी पर आरोप है कि उन्होंने इसमें मदद की। अब एसीबी यह भी देखेगी कि संपत्ति कहां से आई, पैसों का लेनदेन कैसे हुआ और पत्नी की भूमिका क्या रही।

जाधव फिलहाल सोलापुर में कृषि तकनीक प्रबंधन एजेंसी (ATMA) के प्रोजेक्ट ऑफिस में उप निदेशक हैं और प्रोजेक्ट डायरेक्टर का काम भी देखते हैं। दंपती पुणे के शिवाजीनगर इलाके में कुंदन पार्क में रहता है। जाधव मूल रूप से सतारा जिले की मान तहसील के दहिवडी गांव के हैं। उन्होंने पुणे के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर से बीएससी और दापोली के डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ से एमएससी की। वे 4 जून 1994 को कृषि अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी में आए और ठाणे, पुणे समेत कई जगहों पर अहम पदों पर रहे। पुणे में वे उप निदेशक और अधीक्षक कृषि अधिकारी भी रह चुके हैं। दोनों की शादी 28 मई 1996 को हुई थी।

इस केस से कृषि विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर गरम हो गया है। अब जांच करने वालों को इस 4.37 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति के पीछे की पूरी कड़ी साबित करनी होगी।

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