पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका के मुख्य अभियंता 19 हजार की रिश्वत के आरोप में एसीबी की हिरासत में
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पानीपुरवठा विभाग के ठेकेदार के टेंडर करारनामे पर दस्तखत के बदले रिश्वत लेने के आरोप में मुख्य अभियंता प्रमोद ओंभासे को एसीबी ने रंगेहाथ हिरासत में लिया।
देश की सबसे अमीर महानगरपालिकाओं में गिनी जाने वाली पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका पर रिश्वतखोरी का दाग फिर गहरा गया है। भ्रष्टाचार निरोधक विभाग यानी एसीबी ने मुख्य अभियंता प्रमोद ओंभासे को 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ हिरासत में लिया है। ओंभासे पर आरोप है कि उन्होंने पानी सप्लाई विभाग के एक ठेकेदार के टेंडर करारनामे पर दस्तखत करने के लिए यह रकम ली।
बताया गया है कि शहर अभियंता स्तर के इतने वरिष्ठ अधिकारी पर इस तरह सीधी कार्रवाई पहली बार हुई है। इसी वजह से महापालिका के गलियारों में जबरदस्त हलचल है। इस कार्रवाई से राज्य भर में महापालिका की बदनामी हुई है, और नागरिकों व ठेकेदारों में भारी गुस्सा है।
शिकायत करने वाले ठेकेदार का कहना है कि सिर्फ ओंभासे ही नहीं, संयुक्त शहर अभियंता अजय सूर्यवंशी ने भी करारनामे पर दस्तखत के लिए रिश्वत मांगी थी। शिकायत में सूर्यवंशी का साफ जिक्र है, इसलिए अब सबकी नजर इस पर है कि एसीबी का शिकंजा उन पर भी कसेगा या नहीं।
महापालिका में खुलेआम चर्चा है कि टेंडर का प्रस्ताव बनाने से लेकर काम के बिल पास करने, पसंदीदा ठेकेदारों के लिए शर्तें ढीली करने और आखिर में वर्क ऑर्डर देने तक हर स्टेज पर "कमीशन" तय रहता है। कहा जाता है कि "जेब गरम किए बिना फाइल आगे नहीं सरकती"। इससे पहले भी पानी सप्लाई विभाग के अनुरेखक दिलीप आडे को काम का आदेश देने की फाइल आगे भेजने के लिए पूरे एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं। 17 फरवरी 1997 से आज तक महापालिका के 39 अधिकारियों और कर्मचारियों पर रिश्वतखोरी के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें उस समय की स्थायी समिति के अध्यक्ष और उनके चार कर्मचारी भी थे। अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2026 के बीच, यानी पिछले नौ साल में, एसीबी के जाल में फंसकर 18 लोगों को जेल जाना पड़ा। इनमें उस वक्त के आयुक्त के पीए से लेकर बीट निरीक्षक, प्रधानाध्यापक, सर्वेयर और जूनियर इंजीनियर तक शामिल हैं।
12 मार्च 2022 से 6 फरवरी 2026 तक महापालिका में प्रशासक का राज रहा। उस दौरान जनप्रतिनिधियों का कोई अंकुश नहीं था और रिश्वतखोरी चरम पर पहुंच गई थी। इन चार सालों में 6 अधिकारी और कर्मचारी एसीबी के जाल में फंसे। महापालिका सभा में बार-बार यही आरोप लगता रहा है कि अधिकारियों की बेखौफी से महापालिका की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
6 फरवरी 2026 को महापालिका में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता आई तो उम्मीद थी कि रिश्वतखोरी पर लगाम लगेगी। लेकिन नई सत्ता के सिर्फ नौ महीनों में ही 3 लोग एसीबी के जाल में आ चुके हैं। इनमें मुख्य अभियंता, सिविल इंजीनियरिंग सहायक और कर संग्रह विभाग का एक क्लर्क शामिल है।
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