मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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बारामती में एक रात में 158 मिमी बारिश, सड़कें पानी में, नगरपालिका के स्कूलों की छुट्टी

बारामती में एक रात में 158 मिमी बारिश, सड़कें पानी में, नगरपालिका के स्कूलों की छुट्टी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

पुणे जिले में बेमौसम बारिश से सूखे के बीच राहत मिली है, लेकिन बारामती और पुणे शहर में सड़कों पर पानी भरने से आवाजाही रुकी।

राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसी बीच पुणे जिले में बेमौसम बारिश ने जोरदार दस्तक दी है। पुणे शहर के साथ बारामती, इंदापुर और जिले के कुछ और इलाकों में तेज बारिश हो रही है। कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को इससे राहत मिली है, लेकिन अचानक आई इस बारिश से रोजमर्रा की जिंदगी भी बिगड़ गई है।

सबसे ज्यादा असर बारामती में दिखा। वहां कुछ ही घंटों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई। एक ही रात में महीने भर जितना पानी गिर गया और शहर की सड़कें नदी जैसी दिखने लगीं।

2 नवंबर को सुबह होने से पहले शुरू हुई बारिश का जोर अगले कुछ घंटे तक बना रहा। सिर्फ ढाई से तीन घंटे की तेज बारिश में शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए। सुबह सात बजे तक बारामती में पूरे 158 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इतने कम समय में इतना पानी गिरने से सड़कों पर जमा हो गया। भिगवण रोड पर भी काफी पानी भर गया, जिससे ट्रैफिक पर असर पड़ा। अचानक बारिश आने से गाड़ी चलाने वालों और आम लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।

बारिश की तेजी और बने हालात को देखते हुए बारामती नगरपालिका के स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। इससे बच्चों को राहत मिली है। दूसरी तरफ, एक रात की इस जोरदार बारिश से बारामती के लोग खुश भी हैं। सूखे का सामना कर रहे इलाकों में इस बारिश को राहत की खबर की तरह देखा जा रहा है।

पुणे शहर में भी कल से बेमौसम बारिश जोर पकड़े हुए है। आज सुबह भी शहर के कई इलाकों में तेज बौछारें पड़ रही हैं। काम से घर से निकले लोगों को काफी दिक्कत हुई। पुणे-नाशिक हाईवे पर कुछ जगह पानी भर गया है, जिससे ट्रैफिक की समस्या गंभीर हो गई है। पानी के बीच से रास्ता निकालने में गाड़ी वालों को मुश्किल आ रही है।

इस बीच पुणे जिले के भोर तालुका में नीरा घाटी से भी एक अहम खबर आई है। नीरा देवघर बांध से 750 क्यूसेक की रफ्तार से नीरा नदी में पानी छोड़ना शुरू किया गया है। पिछले तीन महीने से बारिश गायब थी, जिससे खरीफ की फसलों को पानी की कमी से भारी नुकसान हुआ था। खड़ी फसलें बचाने के लिए बांध से पानी छोड़ने की मांग किसान लगातार कर रहे थे।

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